[Fictional Letter] Teachers Day Special : “आपने डैडी की इतनी हेल्प क्यों की ?”

प्यारी सुशीला कोठारी जी, पहले मैं आपको अपना इंट्रोडक्शन दे दूँ. मेरा नाम रिषित है. मैं 6 साल का हूँ, सनबीम स्कूल में पढता हूँ और उदयपुर में रहता हूँ. ये चिट्ठी मैं आपको छिप कर लिख रहा हूँ और पता नहीं

पद्म भूषण श्री अनिल बोर्दिया नहीं रहे!

अपने घर के एक कमरे में एक साधारण सा ऑफिस… एक साधारण मेज, कुल जमा तीन लकड़ी की बिलकुल साधारण कुर्सियां, जिसमे से एक पर अपनी रीढ़ को बिलकुल सीधा किये हुए बैठा एक बुज़ुर्ग, जो रिटायर्ड तो लगता था किन्तु

आज कारगिल विजय दिवस है

आज 26 जुलाई है. कारगिल विजय दिवस. जब बर्फ और सर्दी की आड़ में भारत के अभिन्न अंग कश्मीर के बड़े हिस्से में पाकिस्तानी सेना ने अपना अवैध कब्ज़ा जमा लिया, आज ही के दिन भारतीय सेना के जाबांज जवानो ने

मेरे सपनो की बारिश, कब आओगी तुम ??

वर्षा ऋतू हमें गहराई तक छूती है. सावन में सिर्फ तन ही नहीं भीगता, अंदर तक भिगो जाती है बरखा की बूंदें… सावन की रिम झिम फुहारों के बीच उगते अंकुरों, हरे होते पहाड़ों और, और ज्यादा गहराई तक नीली होती

Media steals credits of UdaipurBlog.com Pictures : ये तो हद ही हो गयी !!

इसे कहते है, मेहनत करे कोई और “जनहित” के नाम पर उसका लाभ उठाये कोई ! कुछ ऐसा ही हुआ है हाल ही में “उदयपुर ब्लॉग”(UdaipurBlog.com) के साथ और करने वाले और कोई नहीं अपितु लोकतंत्र के चौथे स्तंभ “पत्रकारिता” के लोग,

मेवाड़ के प्रमुख शक्तिपीठ – The Major Temples of Mewar

“जगदम्बा थे तो ओढ़ बताओ रे , महारानी थे तो  ओढ़ बताओ रे.. क’शिक लागे, तारा री चुनडी..” सुबह सुबह उनींदी आँखों से उठा तो दादी सा’ मंदिर में पूजा करती हुई ऐसा ही कुछ भजन गुनगुना रही थी. पूछा तो आँखें तरेर

आज दशामाता व्रत पूजन

होली के दसवे दिन राजस्थान और गुजरात प्रांत में दशामाता व्रत पूजा का विधान है. सौभाग्यवती महिलाएं ये व्रत अपने पति कि दीर्घ आयु के लिए रखती है. प्रातः जल्दी उठकर आटे से माता पूजन के लिए विभिन्न गहने

श्री श्री रवि शंकर जी : मिजाज़ से अलमस्त फकीर

“फलक बोला खुद के नूर का मैं आशिकाना हूँ.. ज़मीं बोली उन्ही जलवों का मैं भी आस्ताना हूँ..” नमस्ते जी. आज की बात शुरू करने से पहले तक मुझे हज़ार हिचकियाँ आ चुकी है. इस ख़याल भर से कि आज मुझे इतनी बड़ी शख्सियत

यो म्हारो उदियापुर है…!

यो म्हारो उदियापुर है…! उदयपुर में एक खास किस्म की नफासत है जो दिल्ली, जयपुर या किसी और शहर में नहीं मिलती. केवल इमारतें या बाग-बगीचें ही नहीं,बल्कि उदयपुरी जुबां भी ऐसी है कि कोई बोले तो लगता है

कोई तो ध्यान दो इधर !! – The Dirty Pictures

दुनियाभर के पर्यटक उदयपुर क्यों आते है ?? जवाब आसान है. यूँ तो बहुत कुछ है उदयपुर में देखने, महसूस करने के लिए पर मुख्यतः यहाँ की झीलें निहारने के लिए विदेशी पर्यटक और हमारे अपने देशवासी भी बार बार