श्रीनाथ जी : विशेष मनोरथ आज से

श्रीगोवर्धननाथ पाद युगलं हैयंगवीनप्रियम्‌,
नित्यं श्रीमथुराधिंप सुखकरं श्रीविट्ठलेश मुदा ।
श्रीमद्वारवतीश गोकुलपति श्रीगोकुलेन्दुं विभुम्‌,
श्रीमन्मन्मथ मोहनं नटवरं श्रीबालकृष्णं भजे ॥

आचार्य चरण, प्रभुचरण सहित सप्त आचार्य वर्णन-
श्रीमद्वल्लभविट्ठलौ गिरिधरं गोविंदरायाभिधम्‌,
श्रीमद् बालकृष्ण गोकुलपतिनाथ रघूणां तथा
एवं श्रीयदुनायकं किल घनश्यामं च तद्वंशजान्‌,
कालिन्दीं स्वगुरुं गिरिं गुरुविभूं स्वीयंप्रभुंश्च स्मरेत्‌ ॥

श्रीजी को धराये गए छप्पन भोग, दर्शन… (साभार: श्यामा स्टूडियो)
नवनीतप्रिय जी (लालन प्रभु) दर्शन… (साभार: श्यामा स्टूडियो)

अखिल भारतीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की प्रधान पीठ श्री नाथद्वारा में  आगामी तीन दिनों तक विशेष मनोरथ का आगाज़ आज से होगा. तिलकायत महाराज श्री विशाल बावा के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में ये मनोरथ आयोजित किया जा रहा है| श्रीनाथ मंदिर मंडल से udaipurblog.com को मिली जानकारी के अनुसार पहले दिन आज श्रीजी को छप्पन भोग धराया जायेगा | छप्पन भोग पर श्रीजी को विशेष श्रृंगार और राजभोग दर्शन में अनूठा वागा (वस्त्र) धारण करवा कर लाड लड़ाए जायेंगे. श्रीनाथजी के सभी दर्शन पूर्व नियोजित कार्यक्रम अनुसार ही होंगे. छप्पन भोग के लिए श्रीनाथजी की रसोई में विशेष तैयारियों के साथ पकवान बनाये जा रहे हैं किन्तु उसकी जानकारी गोपनीय रखी गयी है. तर्क दिया जाता है कि श्रीजी का स्वरुप बाल कृष्ण स्वरुप है और किसी बालक को खिलाये जाने वाले भोजन की जानकारी यदि माता किसी को दे तो बालक को “नज़र” लगने का भय होता है.

मनोरथ के दुसरे दिन लालन नवनीतप्रिया जी मंदिरजी से टाटोल गौशाला विहार हेतु पधारेंगे. तीसरे दिन वहीँ लालन को सोने के बंगले की झांकी का मनोरथ होगा. लालन को सोने के बंगले में विराजित करवाया जायेगा. दो दिवस तक लालन श्रीजी के गौओं के बीच विहार करेंगे. टाटोल गौशाला आने जाने के लिए मंदिर मंडल की ओर से बस स्टेंड, नाथद्वारा से सीधी निशुल्क बस सेवा उपलब्ध होगी.

मंदिरजी पर तिलकायत के जन्मोत्सव पर विशेष पंचरंगी ध्वजा चढ़ाई जाएगी. अनूठे श्रृंगार के बीच पुष्प चढ़कर लड़ लड़ाए जायेंगे. लालन को झुला झुलाया जायेगा. तीन दिवस तक श्रीजी के भी विशेष दर्शन होंगे. सप्त दर्शन समय यथावत रहेंगे. मंगला प्रातः 5 – 5.15AM बजे, श्रृंगार 7 – 7.15AM  बजे, ग्वाल 8.30 – 8.40AM , राजभोग 11.40-12.15 PM, उत्थापन दर्शन सायं 3.45- 4.00PM बजे, भोग 5- 5.05PM , आरती 6.00-6.15 PM  शयन (गुप्त) दर्शनों का समय रहेगा.
आगामी तीन दिनों तक वैष्णव नगरी पूर्ण रूप से श्रीजी के मनोरथ रंग में रंगी नज़र आएगी.

प्रथम दर्शन: मंगला
द्वितीय दर्शन: श्रृंगार
तृतीय दर्शन: ग्वाल
चतुर्थ दर्शन: राजभोग
पंचम दर्शन: उत्थापन
सायंकालीन दर्शन: भोग
आरती दर्शन

उल्लेखनीय है कि पुष्टि मार्ग में भगवान कृष्ण के उस स्वरूप की आराधना की जाती है जिसमें उन्होंने बाएँ हाथ से गोवर्धन पर्वत उठा रखा है और उनका दायाँ हाथ कमर पर है।
श्रीनाथ जी का बायाँ हाथ 1410 में गोवर्धन पर्वत पर प्रकट हुआ। उनका मुख तब प्रकट हुआ जब श्री वल्लभाचार्यजी का जन्म 1479 में हुआ। अर्थात्‌ कमल के समान मुख का प्राकट्य हुआ।
1493 में श्रीवल्लभाचार्य को अर्धरात्रि में भगवान श्रीनाथ जी के दर्शन हुए।साधू पांडे जो गोवर्धन पर्वत की तलहटी में रहते थे उनकी एक गाय थी। एक दिन गाय ने श्रीनाथ जी को दूध चढ़ाया। शाम को दुहने पर दूध न मिला तो दूसरे दिन साधू पांडे गाय के पीछे गया और पर्वत पर श्रीनाथजी के दर्शन पाकर धन्य हो गया। दूसरी सुबह सब लोग पर्वत पर गए तो देखा कि वहाँ दैवीय बालक भाग रहा था। वल्लभाचार्य को उन्होंने आदेश दिया कि मुझे एक स्थल पर विराजित कर नित्य प्रति मेरी सेवा करो। तभी से श्रीनाथ जी की सेवा मानव दिनचर्या के अनुरूप की जाती है। इसलिए इनके मंगला, श्रृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, आरती, भोग, शयन के दर्शन होते हैं। कालांतर में मुस्लिम आतातियों के निरंतर आक्रमणों और मीरा बाई को दिए वचन के चलते श्रीजी मेवाड़ पधारे और पहले घसियार और बाद में श्रीनाथद्वारा में पधारे. तभी से श्रीनाथद्वारा वैष्णवों का प्रमुख तीर्थ स्थल है.

Article By : Arya Manu  (आर्य मनु)

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3 thoughts on “श्रीनाथ जी : विशेष मनोरथ आज से

  1. lala Shreenathji to shabhi ke pyare hai, unka swaroop v swabhav sabko moh leta hai. unke darsan karke bahar aaya to paya mera patka kandhe par nahi hai. Mai bhut khuush hua aur jor se hus pada. are balihari teri tujhe pasand aaya. mujhe hasta dekh meri bahin ne poochha kyo has raha hai maine bataya. Tabhi meri nazar padi ki vo patka to policevale ke hath mai hai, mujhe ye dekh ke dukh hua. Maine policevale se patka le liya. Aap yah batane ka kust karen ki … kya Lal ko pasand nahi aaya, ya unhone use prasad roop me mujhe louta diya ? with regard Dr. R. P. Sharma

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