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मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

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वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है। राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है। उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। >मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा, अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है। स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे। मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है। स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है। मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है। मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं। श्री गौरीशंकर ओझा की पुस्तक “मेवाड़ राज्य का इतिहास” एक ऐसी पुस्तक है जिसे मेवाड़ के सभी शासकों के नाम एवं क्रम के लिए सर्वाधिक प्रमाणिक माना जाता है.

मेवाड में गहलोत राजवंश – बप्पा ने सन 734 ई० में चित्रांगद गोरी परमार से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गहलौत वंश के शासक का सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था। इसके बाद के शासकों के नाम और समय काल निम्न था –
  1. रावल बप्पा ( काल भोज ) – 734 ई० मेवाड राज्य के गहलौत शासन के सूत्रधार।
  2. रावल खुमान – 753 ई०
  3. मत्तट – 773 – 793 ई०
  4. भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
  5. रावल सिंह – 813 – 828 ई०
  6. खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
  7. महायक – 853 – 878 ई०
  8. खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
  9. भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
  10. अल्लट – 951 – 971 ई०
  11. नरवाहन – 971 – 973 ई०
  12. शालिवाहन – 973 – 977 ई०
  13. शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
  14. अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
  15. शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
  16. नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
  17. कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
  18. योगराज – 1051 – 1068 ई०
  19. वैरठ – 1068 – 1088 ई०
  20. हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
  21. वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
  22. विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
  23. अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
  24. चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
  25. विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
  26. रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
  27. क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
  28. सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०

(क्षेम सिंह के दो पुत्र सामंत और कुमार सिंह। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान मेवाड पर अधिकार कर लिया। सामंत सिंह अहाड की पहाडियों पर चले गये। इन्होने बडौदे पर आक्रमण कर वहां का राज्य हस्तगत कर लिया। लेकिन इसी समय इनके भाई कुमार सिंह पुनः मेवाड पर अधिकार कर लिया। )

  1. कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
  2. मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
  3. पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
  4. जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
  5. तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
  6. समर सिंह – 1273 – 1301 ई०

(समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं। )

35. रतन सिंह ( 1301-1303 ई० ) – इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।
36. अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई० ) – हमीर राज्य के उत्तराधिकारी थे किन्तु अवयस्क थे। इसलिए अजय सिंह गद्दी पर बैठे।
37. महाराणा हमीर सिंह ( 1326 – 1364 ई० ) – हमीर ने अपनी शौर्य, पराक्रम एवं कूटनीति से मेवाड राज्य को तुगलक से छीन कर उसकी खोई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और अपना नाम अमर किया महाराणा की उपाधि धारण की । इसी समय से ही मेवाड नरेश महाराणा उपाधि धारण करते आ रहे हैं।
38. महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1364 – 1382 ई० )
39. महाराणा लाखासिंह ( 1382 – 1421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।
40. महाराणा मोकल ( 1421 – 1433 ई० )
41. महाराणा कुम्भा ( 1433 – 1469 ई० ) – इन्होने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों के निर्माण के रुप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है. इनके पुत्र उदा ने इनकी हत्या करके मेवाड के गद्दी पर अधिकार जमा लिया।
42. महाराणा उदा ( उदय सिंह ) ( 1468 – 1473 ई० ) – महाराणा कुम्भा के द्वितीय पुत्र रायमल, जो ईडर में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे, आक्रमण करके उदय सिंह को पराजित कर सिंहासन की प्रतिष्ठा बचा ली। अन्यथा उदा पांच वर्षों तक मेवाड का विनाश करता रहा।
43. महाराणा रायमल ( 1473 – 1509 ई० ) – सबसे पहले महाराणा रायमल के मांडू के सुल्तान गयासुद्दीन को पराजित किया और पानगढ, चित्तौड्गढ और कुम्भलगढ किलों पर पुनः अधिकार कर लिया पूरे मेवाड को पुनर्स्थापित कर लिया। इसे इतना शक्तिशाली बना दिया कि कुछ समय के लिये बाह्य आक्रमण के लिये सुरक्षित हो गया। लेकिन इनके पुत्र संग्राम सिंह, पृथ्वीराज और जयमल में उत्तराधिकारी हेतु कलह हुआ और अंततः दो पुत्र मारे गये। अन्त में संग्राम सिंह गद्दी पर गये।
44. महाराणा सांगा ( संग्राम सिंह ) ( 1509 – 1527 ई० ) – महाराणा सांगा उन मेवाडी महाराणाओं में एक था जिसका नाम मेवाड के ही वही, भारत के इतिहास में गौरव के साथ लिया जाता है। महाराणा सांगा एक साम्राज्यवादी व महत्वाकांक्षी शासक थे, जो संपूर्ण भारत पर अपना अधिकार करना चाहते थे। इनके समय में मेवाड की सीमा का दूर – दूर तक विस्तार हुआ। महाराणा हिन्दु रक्षक, भारतीय संस्कृति के रखवाले, अद्वितीय योद्धा, कर्मठ, राजनीतीज्ञ, कुश्ल शासक, शरणागत रक्षक, मातृभूमि के प्रति समर्पित, शूरवीर, दूरदर्शी थे। इनका इतिहास स्वर्णिम है। जिसके कारण आज मेवाड के उच्चतम शिरोमणि शासकों में इन्हे जाना जाता है।
45. महाराणा रतन सिंह ( 1528 – 1531 ई० )
46. महाराणा विक्रमादित्य ( 1531 – 1534ई० ) – यह अयोग्य सिद्ध हुआ और गुजरात के बहादुर शाह ने दो बार आक्रमण कर मेवाड को नुकसान पहुंचाया इस दौरान 1300 महारानियों के साथ कर्मावती सती हो गई। विक्रमादित्य की हत्या दासीपुत्र बनवीर ने करके 1534 – 1537 तक मेवाड पर शासन किया। लेकिन इसे मान्यता नहीं मिली। इसी समय सिसोदिया वंश के उदय सिंह को पन्नाधाय ने अपने पुत्र की जान देकर भी बचा लिया और मेवाड के इतिहास में प्रसिद्ध हो गई।
47. महाराणा उदय सिंह ( 1537 – 1572 ई० ) – मेवाड़ की राजधानी चित्तोड़गढ़ से उदयपुर लेकर आये. गिर्वा की पहाड़ियों के बीच उदयपुर शहर इन्ही की देन है. इन्होने अपने जीते जी गद्दी ज्येष्ठपुत्र  जगमाल को दे दी, किन्तु उसे सरदारों ने नहीं माना, फलस्वरूप छोटे बेटे प्रताप को गद्दी मिली.

48. महाराणा प्रताप ( 1572 -1597 ई० ) – इनका जन्म 9 मई 1540 ई० मे हुआ था। राज्य की बागडोर संभालते समय उनके पास न राजधानी थी न राजा का वैभव, बस था तो स्वाभिमान, गौरव, साहस और पुरुषार्थ। उन्होने तय किया कि सोने चांदी की थाली में नहीं खाऐंगे, कोमल शैया पर नही सोयेंगे, अर्थात हर तरह विलासिता का त्याग करेंगें। धीरे – धीरे प्रताप ने अपनी स्थिति सुधारना प्रारम्भ किया। इस दौरान मान सिंह अकबर का संधि प्रस्ताव लेकर आये जिसमें उन्हे प्रताप के द्वारा अपमानित होना पडा।
परिणाम यह हुआ कि 21 जून 1576 ई० को हल्दीघाटी नामक स्थान पर अकबर और प्रताप का भीषण युद्ध हुआ। जिसमें 14 हजार राजपूत मारे गये। परिणाम यह हुआ कि वर्षों प्रताप जंगल की खाक छानते रहे, जहां घास की रोटी खाई और निरन्तर अकबर सैनिको का आक्रमण झेला, लेकिन हार नहीं मानी। ऐसे समय भीलों ने इनकी बहुत सहायता की।अन्त में भामा शाह ने अपने जीवन में अर्जित पूरी सम्पत्ति प्रताप को देदी। जिसकी सहायता से प्रताप चित्तौडगढ को छोडकर अपने सारे किले 1588 ई० में मुगलों से छिन लिया। 19 जनवरी 1597 में चावंड में प्रताप का निधन हो गया।

49. महाराणा अमर सिंह -(1597 – 1620 ई० ) – प्रारम्भ में मुगल सेना के आक्रमण न होने से अमर सिंह ने राज्य में सुव्यवस्था बनाया। जहांगीर के द्वारा करवाये गयें कई आक्रमण विफ़ल हुए। अंत में खुर्रम ने मेवाड पर अधिकार कर लिया। हारकर बाद में इन्होनें अपमानजनक संधि की जो उनके चरित्र पर बहुत बडा दाग है। वे मेवाड के अंतिम स्वतन्त्र शासक है।
50. महाराणा कर्ण सिद्ध ( 1620 – 1628 ई० ) –
इन्होनें मुगल शासकों से संबंध बनाये रखा और आन्तरिक व्यवस्था सुधारने तथा निर्माण पर ध्यान दिया।
51.महाराणा जगत सिंह ( 1628 – 1652 ई० )
52. महाराणा राजसिंह ( 1652 – 1680 ई० ) – यह मेवाड के उत्थान का काल था। इन्होने औरंगजेब से कई बार लोहा लेकर युद्ध में मात दी। इनका शौर्य पराक्रम और स्वाभिमान महाराणा प्रताप जैसे था। इनकों राजस्थान के राजपूतों का एक गठबंधन, राजनितिक एवं सामाजिक स्तर पर बनाने में सफ़लता अर्जित हुई। जिससे मुगल संगठित लोहा लिया जा सके। महाराणा के प्रयास से अंबेर, मारवाड और मेवाड में गठबंधन बन गया। वे मानते हैं कि बिना सामाजिक गठबंधन के राजनीतिक गठबंधन अपूर्ण और अधूरा रहेगा। अतः इन्होने मारवाह और आमेर से खानपान एवं वैवाहिक संबंध जोडने का निर्णय ले लिया। राजसमन्द झील एवं राजनगर इन्होने ही बसाया.
53. महाराणा जय सिंह ( 1680 – 1698 ई० ) – जयसमंद झील का निर्माण करवाया.
54. महाराणा अमर सिंह द्वितीय ( 1698 – 1710 ई० ) – इसके समय मेवाड की प्रतिष्ठा बढी और उन्होनें कृषि पर ध्यान देकर किसानों को सम्पन्न बना दिया।
55. महाराणा संग्राम सिंह ( 1710 – 1734 ई० ) –
महाराणा संग्राम सिंह दृढ और अडिग, न्यायप्रिय, निष्पक्ष, सिद्धांतप्रिय, अनुशासित, आदर्शवादी थे। इन्होने 18 बार युद्ध किया तथा मेवाड राज्य की प्रतिष्ठा और सीमाओं को न केवल सुरक्षित रखा वरन उनमें वृध्दि भी की।
56. 
महाराणा जगत सिंह द्वितीय ( 1734 – 1751 ई० ) – ये एक अदूरदर्शी और विलासी शासक थे। इन्होने जलमहल बनवाया। शहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) को अपना “पगड़ी बदल” भाई बनाया और उन्हें अपने यहाँ पनाह दी.
57.
महाराणा प्रताप सिंह द्वितीय ( 1751 – 1754 ई० )
58. महाराणा राजसिंह द्वितीय ( 1754 – 1761 ई० )
59. महाराणा अरिसिंह द्वितीय ( 1761 – 1773 ई० )
60.
महाराणा हमीर सिंह द्वितीय ( 1773 – 1778 ई० ) – इनके कार्यकाल में सिंधिया और होल्कर ने मेवाड राज्य को लूटपाट करके तहस – नहस कर दिया।
61. महाराणा भीमसिंह ( 1778 – 1828 ई० ) –
इनके कार्यकाल में भी मेवाड आपसी गृहकलह से दुर्बल होता चला गया।  13 जनवरी 1818 को ईस्ट इंडिया कम्पनी और मेवाड राज्य में समझौता हो गया। अर्थात मेवाड राज्य ईस्ट इंडिया के साथ चला गया।मेवाड के पूर्वजों की पीढी में बप्पारावल, कुम्भा, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप जैसे तेजस्वी, वीर पुरुषों का प्रशासन मेवाड राज्य को मिल चुका था। प्रताप के बाद अधिकांश पीढियों में वह क्षमता नहीं थी जिसकी अपेक्षा मेवाड को थी। महाराजा भीमसिंह योग्य व्यक्ति थे\ निर्णय भी अच्छा लेते थे परन्तु उनके क्रियान्वयन पर ध्यान नही देते थे। इनमें व्यवहारिकता का आभाव था।ब्रिटिश एजेन्ट के मार्गदर्शन, निर्देशन एवं सघन पर्यवेक्षण से मेवाड राज्य प्रगति पथ पर अग्रसर होता चला गया।
62.
महाराणा जवान सिंह ( 1828 – 1838 ई० ) – निःसन्तान। सरदार सिंह को गोद लिया ।
63. महाराणा सरदार सिंह ( 1838 – 1842 ई० ) – निःसन्तान। भाई स्वरुप सिंह को गद्दी दी.
64. 
महाराणा स्वरुप सिंह ( 1842 – 1861 ई० ) – इनके समय 1857 की क्रान्ति हुई। इन्होने विद्रोह कुचलने में अंग्रेजों की मदद की।
65. महाराणा शंभू सिंह ( 1861 – 1874 ई० ) – 
1868 में घोर अकाल पडा। अंग्रेजों का हस्तक्षेप बढा।
66 .
महाराणा सज्जन सिंह ( 1874 – 1884 ई० ) – बागोर के महाराज शक्ति सिंह के कुंवर सज्जन सिंह को महाराणा का उत्तराधिकार मिला।  इन्होनें राज्य की दशा सुधारनें में उल्लेखनीय योगदान दिया।
67. महाराणा फ़तह सिंह ( 1883 – 1930 ई० ) – सज्जन सिंह के निधन पर शिवरति शाखा के गजसिंह के अनुज एवं दत्तक पुत्र फ़तेहसिंह को महाराणा बनाया गया। फ़तहसिंह कुटनीतिज्ञ, साहसी स्वाभिमानी और दूरदर्शी थे। संत प्रवृति के व्यक्तित्व थे. इनके कार्यकाल में ही किंग जार्ज पंचम ने दिल्ली को देश की राजधानी घोषित करके दिल्ली दरबार लगाया. महाराणा दरबार में नहीं गए . 
68. महाराणा भूपाल सिंह (1930 – 1955 ई० ) –
इनके समय  में भारत को स्वतन्त्रता मिली और भारत या पाक मिलने की स्वतंत्रता। भोपाल के नवाब और जोधपुर के महाराज हनुवंत सिंह पाक में मिलना चाहते थे और मेवाड को भी उसमें मिलाना चाहते थे। इस पर उन्होनें कहा कि मेवाड भारत के साथ था और अब भी वहीं रहेगा। यह कह कर वे इतिहास में अमर हो गये। स्वतंत्र भारत के वृहद राजस्थान संघ के भूपाल सिंह प्रमुख बनाये गये।
69. महाराणा भगवत सिंह ( 1955 – 1984 ई० )
70. श्रीजी अरविन्दसिंह एवं महाराणा महेन्द्र सिंह (1984 ई० से निरंतर..)


इस तरह 556 ई० में जिस गुहिल वंश की स्थापना हुई बाद में वही सिसोदिया वंश के नाम से जाना गया । जिसमें कई प्रतापी राजा हुए, जिन्होने इस वंश की मानमर्यादा, इज्जत और सम्मान को न केवल बढाया बल्कि इतिहास के गौरवशाली अध्याय में अपना नाम जोडा । यह वंश कई उतार-चढाव और स्वर्णिम अध्याय रचते हुए आज भी अपने गौरव और श्रेष्ठ परम्परा के लिये जाना पहचाना जाता है। धन्य है वह मेवाड और धन्य सिसोदिया वंश जिसमें ऐसे ऐसे अद्वीतिय देशभक्त दिये।

(साभार – मेवाड़ राजवंश का इतिहास – गौरीशंकर ओझा)

Post Contribution by : Arya Manu

About Author

26 yr old guy from Udaipur/Noida currently working in Spiritual Media. He contributes for Media and social service as well. Internet addict, Word Gamer, Part time anchor and full time "Babaji".

202 Comments

  • S P Ameta
    January 10, 2012 at 8:08 pm

    Jo Dhardh rakhe Dharm Ko , Tahi Rakhe Kartar !!

    Reply
    • Suryabhan Singh
      January 18, 2012 at 12:57 am

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  • Mewari from Saudia
    January 11, 2012 at 12:30 pm

    Please Correct ..In Maharana Pratap 1572 -1597 Place name Name ” Chawand” – Not Cahndaw

    Thanks .

    Reply
    • Sanjit Chohan
      January 11, 2012 at 5:09 pm

      Sorry That was a Hindi Typing Problem 🙂

      Correction Done 🙂

      Reply
  • Prasun Bannerjee
    January 15, 2012 at 10:28 am

    Nice info provided. Great work 🙂

    Reply
  • Suryabhan Singh
    January 18, 2012 at 1:18 am

    I think their is a correction in Maharana Pratap’s segment the war was fought on 18 June 1576 and between
    Mughal Empire (Mughal Army) under the supervision of Raja Man Singh
    and
    Maharana Pratap.

    Maharana Pratap died on 19 January 1597 injured in hunting.

    Reply
    • Sanjit Chohan
      January 19, 2012 at 12:10 pm

      Corrections done for the day of death 🙂

      The haldighati war date is still mislead but June 21, 1576 is taken in preference.
      About the war we need precise reference for amendments 🙂

      Do contribute its our Udaipur’s Blog

      Reply
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      February 15, 2012 at 12:49 pm

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      Reply
  • Ashish Poddar
    January 18, 2012 at 4:06 pm

    a very gud knowledge for civil services aspirates too.. gud work udaipurbolg team

    Reply
  • Ashish Poddar
    January 18, 2012 at 4:08 pm

    a very gud knowledge for civil services aspirants too
    nice work done udaipurblog team

    Reply
    • Sanjit Chohan
      January 18, 2012 at 8:24 pm

      Thank You Sir 🙂

      Reply
  • ashita dadheech
    February 15, 2012 at 12:52 am

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      February 15, 2012 at 12:26 pm

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      Reply
      • ashita dadheech
        February 16, 2012 at 4:19 pm

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    February 16, 2012 at 6:05 pm

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    Reply
    • ashita dadheech
      February 25, 2012 at 3:54 am

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      Reply
  • Prajapati vinod
    March 7, 2012 at 4:23 pm

    Gani khamma . jay mewar

    Reply
  • rakhi bais
    May 7, 2012 at 11:27 am

    nice imformation…………good work…..!!!!!

    Reply
  • Anil
    August 24, 2012 at 4:33 pm

    Jai Mewar, Jai Hindua Suraj “Maharan Pratap “

    Reply
  • aryan
    September 12, 2012 at 12:51 pm

    sir mare ko chandawat ki History tall me plz

    Reply
  • shrikrishn koyande.
    February 19, 2013 at 1:34 pm

    sir.ji. sneh purvak namaskar. aap jo mahatvpurvak jankari di. us ke liye manpurvak aabhar. kya aap bata sakte ho ke akhand bharat kab haga. qki bhharat ke har rajy me eetne hindutv wadi sanghtnaye hai. vah kya kar rahe hai. kis bat ki pratiksha kar rahe hai.

    Reply
  • Ravindra Rajput
    March 18, 2013 at 9:50 pm

    I need daily update on “Maharana Pratap Ji”.

    Reply
  • sushil Sisodia
    April 9, 2013 at 9:06 pm

    jai maharana g

    Reply
  • Surajbhan Singh Ranawat
    June 11, 2013 at 3:29 pm

    Khamma Khamma Rana Pratap………

    Reply
  • Rupesh singh
    June 16, 2013 at 5:41 pm

    Very very Thank you sir ji for write this udaipur blog. Bs itna btaiye ki kya abhi unke vansaj hai wha pe.

    Reply
    • Sanjit Chohan
      June 16, 2013 at 10:26 pm

      Yeah they do its now continued by : Shri Arvind Singh Ji Mewar

      Reply
  • Ashish verma
    June 21, 2013 at 6:12 pm

    bahut badhiya samrajya tha

    Reply
  • Neeraj Chauhan
    June 22, 2013 at 2:15 pm

    Thanks sir

    Reply
  • kiran sisodiya
    July 7, 2013 at 5:22 pm

    jai Maharanaji.

    Reply
    • RANJIT SINGH SISODIYA
      March 8, 2014 at 6:56 pm

      zindgee ek ganit hai jisme

      dosto ko joda jata hai +
      dusmano ko ghataya jata hai_
      sukho ko gunna kiya jata hai *
      dukho ko bhag kiya jata hai

      mujhe kishi ek jati dharm ke inshan nahi balki
      sabhi dharm jati v ling ke inshan chahiye
      jo meri leval ke hishab se ek inshaniyat ka rista bana sake
      me sadi suda hu or is riste ke alawa sabhi ristey me nibha sakta hu

      yah ek Samaj Sevak Soch Hai
      RS SISODIYA 09828415115

      Reply
  • Harisingh
    July 8, 2013 at 4:39 pm

    Maharana partap ko sat sat namn
    Vo maharana partap kte vo ek ese veer the jo itihas ke panho me amar ho gye ve aaj b har inshan ke dil me amr h
    J maharana partap!!

    Reply
  • Vijendra Singh Chauhan
    July 10, 2013 at 6:00 pm

    Jai maharana Udai Singhji, Jai ho aisi maharani ki jo jauhar ke liye sada tayar rahiti thi. Jai maharan Pratapji ki , jinki biography ko padhkar aaj bhi khoon ubbal uthta he, apne Rajpoot hone parv garv hota he.

    Reply
  • pradeep
    July 29, 2013 at 9:20 am

    jay mahararna partap

    Reply
  • Balwant singh parihar bhawrani Parihar
    August 22, 2013 at 2:58 pm

    Jai mevad

    Reply
  • sushant kumar
    September 2, 2013 at 2:48 pm

    very intresting to know about indian history

    Reply
  • Abhishek kothari
    September 4, 2013 at 12:00 am

    Need a correction in Maharana Peatap’s segment, actually Maharana Pratap was the eldest son of Maharana Udai Singh not Jagmal, as you mentioned.

    Reply
    • avinash gavankar
      September 23, 2013 at 11:08 pm

      yes abhishek u r right

      Reply
  • Abhishek kothari
    September 4, 2013 at 12:01 am

    Need a correction in Maharana Pratap’s segment, actually Maharana Pratap was the eldest son of Maharana Udai Singh not Jagmal, as you mentioned.
    Jagmal was younger than Maharana Pratap.

    Reply
  • ravi ranawat k
    September 24, 2013 at 7:43 pm

    its a awosem……jai rajputana

    Reply
  • nidan
    September 24, 2013 at 9:11 pm

    info given about maharana uday singh, father of maharana pratap seems to be not true, basically info about jagmal.

    Reply
  • AJAYSINHJI SISODIYA
    September 26, 2013 at 5:36 pm

    Jay eklingji
    Aapne jis tarah se kam kiya hai wo kabile- dad hai.rajputo ki aan- ban-aur shan hai sisodiya rajvansh.jo na juka hai na. Jukega.har har mahadev

    Reply
  • lokendra singh chundawat
    October 1, 2013 at 11:09 pm

    maharana lakha was two son chunda and mokal chunda was married and chundawat is chunda vanshaj

    Reply
  • pinky rajput
    October 18, 2013 at 5:13 pm

    great the rajput&rajputan

    Reply
  • pl kumawat CI
    October 22, 2013 at 2:01 pm

    good knowledge

    Reply
  • Arun Singh Ranawat
    November 20, 2013 at 10:26 pm

    Sisodia is great

    Reply
  • rajendrasing chauhan
    November 26, 2013 at 12:38 pm

    prithwiraj chauhan

    Reply
  • r n patel
    January 1, 2014 at 10:10 pm

    jay hind ye padhakar bhut khusihui

    Reply
  • rakesh agrawal
    January 8, 2014 at 12:41 am

    Jai pratap..sir ji accha laga.apne rajasthan ko jan kr.

    Reply
  • Pradeep
    February 6, 2014 at 5:52 pm

    information about jagmal is wrong, jyesth putra nhi the chhote the

    Reply
  • RANJIT SINGH SISODIYA
    March 8, 2014 at 6:41 pm

    meri soch me har ek hindusthani ko rajpoot bankar hi zindgee zina chahiye ,hamare desh me rajpooto ka bahut badda yogdan raha hai, aaj har ek inshan apni jati v pahachan aishe batate h ki mano unhone koi bahut bada nam hashil kar rakha ho, magar apne ganv desh ke bare me koi kuch nahi bolega, isiliye mera manana hai ki rajpoot ek jati nahi balki is desh rajya ka nam hai, inshan kai trah ke hote hai jaise ek sahi or ek galat dono ek sath rahate hai , sahi inshan ko galat banakar jina chahiye ya galat ko sahi banakar zinna chahiye, ye bat to hum sabhi jante hai ki galat ko bhi sahi banakar zinna chahiye n ki sahi ko galat banakar zinna chahiye, isiliye agar har ek hindushai ko rajpoot bankar zinna
    ,,
    jai mata giri
    RANJIT SINGH SISODIYA=09828415115

    Reply
  • Deepak Singh Sisodia
    March 16, 2014 at 4:20 am

    Humein garv hai aise shoorveer sisodia rajputon par jinhone apne vansh ke maan-samman aur ees desh ki raksha hetu nirantar prayasrat rahe. mughaliya saltnat chahe jitne baar bhi rajputo se loha lene ki koshish ki oolte oonsabko apne mooh ki khani padi. dhanya hai mewar ka wo asthan jahan par maharana pratap ka janm huaa. aur dhanya hai mewar ke shashak Rana Udai Singh aur maharani jaivantabai jinhone aise matru-pitru aur desh bhakt Maharana Pratap ko janm diyein. hum sabhi bhartiya nagrikon ko chahiye hi hum bhi maharana pratap ke aadarshon par chalein aur aisa kaam kar jaayein jis se ki apne pariwar ke saath saath apne kool ka bhi bahut naam ho.

    Reply
  • Deepak Singh Sisodia
    March 16, 2014 at 4:31 am

    hum tahedil se shukra guzar hain Sony Entertainment ka jinhone humsabhi ko Dharti ka veer putra Maharana Pratap serial dikha kar ke humein kritarth kiya hai. aur sabse bada shukra guzar hoon Zee tv ke show Dance India Dance se apni chhavi banane wale Faisal Khan ka jinhone ek muslim hote hue bhi ek hindu rajput maharana pratap ke chitran ho bakhubi nibhaya hai we love you Faisal khan.

    Reply
  • harish bhatia
    April 12, 2014 at 12:42 pm

    Maharana pratap was elder son of maharana udey singh, and jagmaal was youngest son .

    Reply
  • Parmeshwar Rajput
    April 15, 2014 at 5:18 pm

    Very thanks great knwldge sir, this history also support Rajput brother’s to change the thinks and prove will, I AM RAJPUT

    Reply
  • satyakam
    April 27, 2014 at 1:52 pm

    apne isme jagmaal ko jyasth or partap ko chotha bataya hai jo ki galat hai

    Reply
  • Mukesh Bhardwaj
    April 29, 2014 at 2:38 pm

    क्या “पीथल और पाथल” में कवि श्री कन्हैया लाल सेठिया द्वारा किया गया वर्णन सही है या एक कपोल कल्पना ? यदि सही है तो ऐसे किसी पत्र या वार्तालाप के प्रमाण “आईने अकबरी” या “अकबरनामा” में तो अवश्य मिलने चाहिएँ। यदि किसी महानुभाव को जानकारी हो तो कृपया सभी से बांटें।

    Reply
  • Ajit Singh
    April 30, 2014 at 2:52 pm

    ajj jo nbhi ye khta h ki wo kisi se darta nhi.
    to samjna ki,
    ya to wo jhoot bol raha h.
    ya fir wo rajput h.

    Reply
  • Ajit Singh
    April 30, 2014 at 2:54 pm

    hme garv h
    hame rajput hone par.

    Reply
  • Ajit Singh
    April 30, 2014 at 2:56 pm

    ajj jo bhi ye khta h ki wo kisi se darta nhi.
    to samjna ki,
    ya to wo jhoot bol raha h.
    ya fir wo rajput h.

    Reply
  • RAMESH
    May 10, 2014 at 7:57 pm

    Maharana partap great king

    Reply
  • ritesh singh chouhan
    May 14, 2014 at 7:09 pm

    mevad ke raja ki jay

    Reply
  • gagan
    May 24, 2014 at 1:53 pm

    bharat desh jaha maharana partap jaise yodha paida hue suna hai unki talwar 40kg ki thi bharat ka nagrik hone par mujhe garv hai

    Reply
  • ankit verma
    May 25, 2014 at 9:16 pm

    maharana pratap story was too good he is so brave

    Reply
  • binal
    June 6, 2014 at 3:31 pm

    story is too good….bt i have to know about merrage life of pratap. and i wan to also know about how he was dead!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    Reply
  • Birendra dwivedi
    June 18, 2014 at 2:02 pm

    Mevar aisa rajy ar mharana prtap jaise yodhya ( knight ) bharat ke ithas ke gaurav hai

    Reply
  • Chiragsingh Barad
    June 21, 2014 at 4:06 pm

    Jay Rajputana

    Reply
  • thakur santkumar sisodiya
    June 29, 2014 at 12:21 am

    jai maharana jai rajputana maharana pratap g aap ke charno mai ke dhul jo mil jaye

    Reply
  • gajendra kumawat
    July 4, 2014 at 2:49 pm

    rana sanga & maharana pratap is the best

    Reply
  • bhagwan singh sisodiya
    July 27, 2014 at 3:59 am

    I respect all Rajput , Maharana Pratap was really Great King of india

    Reply
  • jiral dekhtawala
    August 1, 2014 at 1:55 am

    I also heard abt haldighati yudh maharana pratap’s wear weapon more than his weight… Aprx 140kg (total)
    Jai ekling ji…
    Jai Rajputana….

    Reply
  • jeenendra jain
    August 3, 2014 at 12:28 am

    great information sir ….proud to be maharana pratap’s son ..jai mewar …

    Reply
  • samraj
    August 26, 2014 at 6:06 pm

    nice

    Reply
  • ADAMAY
    August 26, 2014 at 6:08 pm

    JAI MAHARANA PRATAP

    Reply
  • Pihu
    September 2, 2014 at 3:11 pm

    Wooooowww Awsmm History Yaar 🙂

    Reply
  • Rajputazadrana
    September 3, 2014 at 8:12 pm

    Jai maharana partap

    Reply
  • amit mittra
    September 9, 2014 at 12:44 pm

    veer bhumi rajasthan

    Reply
  • pawan rana
    September 16, 2014 at 12:22 pm

    amar rahe maharana partap or amar rahe hamare des k vo veer jinhone apne des ki saan bachayi hai

    Reply
  • Ishawar Chungade
    September 27, 2014 at 10:18 pm

    The great Rajputan

    Reply
  • rajendrsingh
    October 2, 2014 at 5:29 pm

    raja rajvada rajput

    Reply
  • kanhiya s
    October 3, 2014 at 10:26 pm

    I am salute to maharana pratap and his family.he is kohinoor of india.maharana pratap is my heart.I will be regret always I didn’t look maharana pratap.I will definitely go to rajasthan and will be look his empire and great historical warriors maharana pratap and son of Bharat Matt.

    SALUTE-MAHARANA PRATAP

    Reply
  • Gulab singh rajput
    November 11, 2014 at 11:09 am

    jai maharana partap jai mewad jai rajputana
    jai mata di.

    Reply
  • Jaypal Singh
    November 16, 2014 at 8:13 am

    very very proud rana pratap

    Reply
  • Ashok kurka
    November 28, 2014 at 10:01 pm

    Sat sat naman . Jai mewar.

    Reply
  • Madan
    December 8, 2014 at 6:57 pm

    I proud that I am born in rajasthan and solute our matrabhumi for born the great maharana’s

    Reply
  • shivam jadon
    December 10, 2014 at 8:17 pm

    I was always understand that rana sanga was wrong. But i was wrong. Rana sanga was a great warrior

    Reply
    • shubham singh
      January 22, 2016 at 5:23 pm

      rana sanga lost his one eye one hand and one foot in war

      Reply
  • vishal singh
    December 22, 2014 at 9:00 am

    Jai rajputana

    Reply
  • himmat Singh the rajpuat of rajsthan
    December 30, 2014 at 11:18 pm

    The Rajput of RAjshtan jai mewar

    Reply
  • Himmat SiNGH
    December 30, 2014 at 11:28 pm

    The RAjput Of RAJSThAN jai MEwAR

    Reply
  • suresh patel
    January 8, 2015 at 10:15 pm

    Very nice

    Reply
  • chandan singh
    January 21, 2015 at 2:08 pm

    MAHRANA PARTAP WAS REALLY HERO OF MEWAR. I RESPECT TO MAHARANA PARTAP.AND all people will try to life in hero like maharana partap

    Reply
  • sunil kumar
    February 8, 2015 at 11:10 pm

    Is. Baat me koi sak Nhi k jis trah Rajasthan pure bharat me apni veerta k liye mashoor tha.
    ussi trah mewar sampurn Rajasthan me tha.
    dhanya h rana sanga or maharana pratap jinhone k bhi muglo or mullo k age sar jhukaya nhi

    Reply
  • Shyam Sharma
    February 15, 2015 at 12:25 am

    Jai Mewar

    Reply
  • arun rana
    February 28, 2015 at 6:32 pm

    Jai rajputana jai maharana pratap

    Reply
  • mukesh Nagar
    March 6, 2015 at 10:35 pm

    maharana pratap ka prakram

    Reply
  • kajal Chouhan
    March 8, 2015 at 8:42 pm

    I proud of mewar….jai rajputana….jai ho maharana Pratap….he is a real hero of rajisthan…nd I proud of me…for I born on this rajputana city…..

    Reply
    • Manohar Pal
      May 12, 2015 at 9:38 am

      क्‍या अापके पास राजपूतों के इतिहास की पीडीएफ या नोटस मिल सकते है यदि आपके पास इनसे संबंधित कुछ भी नोटस है तो प्‍लीज मुझे मेरी आईडी पर मेल कर दे ।

      Reply
    • rangad shubham
      September 11, 2015 at 2:10 pm

      ma bauth lucky hu ki mera purvaj . gyani maha dani maha parakarmi, suruy kul diwakar, ksahtariya vans ujjagar,bappa rawal vanshaj mewar naresh maharaj diraj mahrana pratap singh tha

      Reply
  • Mahaveer saini
    March 19, 2015 at 8:57 am

    Jai ho sisodiya( saini rajput ) vans ki

    Reply
  • Ujjval kumar
    March 24, 2015 at 7:51 pm

    Maharana pratap jis grass ke roti khay the uska name kya hai?

    Reply
  • mohit singh
    March 29, 2015 at 1:07 am

    Is. Baat me koi sak Nhi k jis trah Rajasthan pure bharat me apni veerta k liye mashoor tha.
    ussi trah mewar sampurn Rajasthan me tha.
    dhanya h rana sanga or maharana pratap jinhone k bhi muglo or mullo k age sar jhukaya nhi jai mewar

    Reply
  • Harsh Wardhan
    April 9, 2015 at 10:28 am

    Mahan-Rana Pratap was the last surya of India

    Reply
    • rangad shubham
      September 11, 2015 at 2:04 pm

      no is wrong .
      veer rajput shivaji was the last suruy of bharat.

      Reply
  • rajeev
    April 18, 2015 at 11:07 am

    I really appreciate braveness of Maharana Pratap, We all proud to him and a great salute for his real worship for his nation. Jay Ekling ji ki.

    Reply
  • neeraj
    April 19, 2015 at 11:00 pm

    Sir aap ne likha ki haldi ghati yudh 21 june ko huya pr kaye book mein mein 18 june likha h….which one is ryt ??

    Reply
  • Sujeet Sisodiya
    May 1, 2015 at 3:58 pm

    I appreciated this information….
    .
    No One can be brave as like as Maharana Pratap…
    .
    Jai Raputana…

    Reply
  • amit. devani
    May 6, 2015 at 11:45 am

    Aese shory. Sahas. Or. Himat k. Liye Maharana pratap ko. Koti. Koti pranam

    Reply
  • Dilip singh
    May 15, 2015 at 3:09 am

    Jai ho Rajputa

    Reply
  • vatan singh
    May 15, 2015 at 2:09 pm

    Shi he rajputo ka khun bhne ke liye hi hota he jay rajputana

    Reply
  • Chetan bacholiya
    May 26, 2015 at 4:28 pm

    MhARANA partap the veer yhoda i like you

    Reply
  • KULDEEP SINGH MASUTA
    May 27, 2015 at 3:44 pm

    Maharana Pratap was the great warrior of India, I proud of him.

    Reply
  • Kapil Sharma
    June 10, 2015 at 5:28 pm

    Shat shat naman aise shoorveer ko ……mitii ka laal maharaana pratap…

    Reply
  • Ramsingh
    June 13, 2015 at 9:33 am

    I am proud up rajput king

    Reply
  • sisodiya pratapsinh
    June 29, 2015 at 5:23 pm

    Jay maharana jay akjinji

    Reply
  • sisodiya pratapsinh
    June 29, 2015 at 5:24 pm

    Jay maharana jay akjinji jay mewad jay sisodiya

    Reply
  • Jitendra rajput
    July 4, 2015 at 6:39 pm

    Jay mharana pratap jay Hindustan in Sur Biro ki blidan se Hindu bache hai.

    Reply
  • ramdev
    July 8, 2015 at 11:45 pm

    I most like maharana pratap

    Reply
  • Bharat Ahir
    July 10, 2015 at 8:33 pm

    Jay maharana partap

    Reply
  • Gajendra singh gahalot
    July 13, 2015 at 1:36 pm

    jay jay maharana pratap

    aapne maharana pratap ki information di

    “”danyawad””

    Reply
  • pawan Kumar Tiwari
    July 20, 2015 at 9:40 pm

    Hi…
    Maharana partap and all veer partap family nt explain any movement . It’s great we love India and we love greatest maharana partap.
    Thank u all.

    Reply
  • pradeep
    July 24, 2015 at 3:54 pm

    ye batye ki kripa karnge kya ki rawal to sisodia me apni beti ke saadi karte he or aapne likha he ki bappa rawal hi sisodia vans ke purvaj he to kya ye apne bhai banduo me hi apni beti ki saadi kese kar sakte he krpya is sansy ka samadhan bhi bataye me apni mail id bhi e raha hu
    pradeepsisodia44@gmail.com

    Reply
    • shubham singh
      January 22, 2016 at 5:01 pm

      भाई रावल एक उपधि हे हे ओर राणा महाराणा भि एक उपधि हे जैसे कि रजा महरजा ठिक इसी तरहा
      रावल बप्पा का वंश गहलोत था जो बाद में सिसोदिय हो गया था

      उपधि को कोई भी महन रजा धारण कर सकता हैं।

      Reply
    • shubham singh
      January 22, 2016 at 5:09 pm

      भाई रावल एक उपधि हे हे ओर राणा महाराणा भि एक उपधि हे जैसे कि रजा महरजा ठिक इसी तरहा
      रावल बप्पा का वंश गहलोत था जो बाद में सिसोदिय हो गया था
      उपधि को कोई भी महन रजा धारण कर सकता हैं।

      Reply
    • शुभम सिंह
      January 26, 2016 at 3:55 am

      हुकुम रावल एक उपाधि हे जिसको कोई भी महान राजा धारण कर सकता हे जैसे सिसोदिया राणा कि उपाधि धारण करते थे
      सिसोदिया पहले गोहिल थे बाद में सिसोदिया हो गए ओर
      बप्पा रावल का वंश गहलौत ओर गोहिल था
      गहलौत कि शाखा
      . अहाडिया गहलौत
      अहाड नामक स्थान पर बसने के कारण यह नाम हुआ।
      2. असिला गहलौत
      सौराष्ट्र में बप्पा के पुत्र ने असिलगढ का निर्माण अपने नाम असिल पर किया जिससे इसका नाम असिला पडा।
      3. पीपरा गहलौत
      बप्पा के एक पुत्र मारवाड के पीपरा पर आधिपत्य पर पीपरा गहलौत वंश चलाया।
      4. मागलिक गहलौत
      लोदल के शासक मंगल के नाम पर यह वंश चला।
      5. नेपाल के गहलोत
      रतन सिंह के भाई कुंभकरन ने नेपाल में आधिपत्य किया अतः नेपाल का राजपरिवार भी मेवाड़ की शाखा है।
      6. सखनियां गहलौत
      रतन सिंह के भाई श्रवण कुमार ने सौराष्ट्र में इस वंश की स्थापना की।
      7. सिसौद गहलौत
      कर्णसिंह के पुत्र को सिसौद की जागीर मिली और सिसौद के नाम पर सिसौदिया गहलौत कहलाया
      सिसौदिया वंश की उपशाखाएं
      चन्द्रावत सिसौदिया
      यह 1275 ई. में अस्तित्व में आई। चन्द्रा के नाम पर इस वंश का नाम चन्द्रावत पडा।
      भोंसला सिसौदिया
      इस वंश की स्थापना सज्जन सिंह ने सतारा में की थी।
      चूडावत सिसौदिया
      चूडा के नाम पर यह वंश चला। इसकी कुल 30 शाखाएं हैं।[
      शक्तावत
      राणावात
      ओर भी हे

      Reply
      • narendra singh kitawat
        June 6, 2017 at 12:42 pm

        हुकम किता से कीतावत शाखा भी है पर ये शाखा कितने नंबर पर है

        Reply
  • Prathmesh Soni
    July 24, 2015 at 4:13 pm

    hello
    amazing information ….
    thank you …

    Reply
  • Inderpal singh
    July 28, 2015 at 12:07 pm

    Jai Mevad
    Jai Ekling Ji
    Jai Maharana
    Jai Hind

    Reply
  • VIRPALSINH GOHIL
    August 15, 2015 at 9:42 am

    jay rajputana

    Reply
  • rajendra singhsisodiya
    August 29, 2015 at 7:33 pm

    Aapne maharanapratap ke itihas ke bsre mai jankari di eske liye pako dhanyswad Rajendra singh shishodiya

    Reply
  • vikash rajput
    September 2, 2015 at 11:35 pm

    Jay rajputana jay maharana pratap aap Amar Ho aaj ham aap ke badaulat and rajputane pe garvv krte h aapko sat sat Naman

    Reply
  • Pravin kumar
    September 23, 2015 at 11:08 pm

    Jai Maharana Pratap Bharat ka veer putra Sat Sat naman. Realy your life story is too much inspiring.

    Reply
  • komal sisodiya
    September 28, 2015 at 8:50 am

    Proud feel hota h maharana pratap ki history sunkrrrrr and rajputo me sabse phle Mariana prtap ka naam liya jaata h…………….ham bhi unhi k vashaj h sisodiya family………………………………..

    Reply
  • komal sisodiya
    September 28, 2015 at 8:53 am

    Sabhi rajputooo ne muglo k aage sirrrrr juka diya……..ek maharana pratap me unka dutekarrr mukabla.kiya tha kabhi nhi harrre…….jai maharana pratap

    Reply
  • keshav sharma
    October 7, 2015 at 9:49 am

    Maharna prtap …uday Singh 2 ke …bde bete the ….or jagmaal or shakti Singh chote bete the unke .. ..uper wrong diya hua h prtap k bare m

    Reply
    • shubham singh
      January 22, 2016 at 5:03 pm

      sahi bola bhai ji

      Reply
  • Pankaj Singh Rajput
    October 8, 2015 at 8:39 am

    jai ho maharana pratap ke

    Reply
  • Mandeep Singh Rajput
    November 23, 2015 at 1:43 am

    Dhanyvad
    Aapne shree maharana Pratap Singh ji ke bare me jankari hum Rajputon Ki san the maharanapratap
    Jay Maharana Pratap
    Jay Rajputana
    Jay hind

    Reply
  • Rana Rudar Chauhan
    December 3, 2015 at 9:34 pm

    Jai Mewad jai Maharana ji jai Rajputana..

    Reply
  • ratan singh
    December 6, 2015 at 11:38 pm

    Jai rajputana

    Reply
  • Kavita Joshi
    December 9, 2015 at 2:50 pm

    We are the most lucky people in the world to have such a great Mewar empire….Maharana Pratap ki jai…jai Eklingji……Hamare veero ko kabhi mat bhulna bharatvasiyo…kyunki yeh sab hi humari dharohar hai…..in mahan aatmao ko shat shat naman….jai Mewar

    Reply
  • Sarthak
    December 11, 2015 at 12:26 am

    Maharana pratap ki jai aj unki he badaulat hm log bharat m azad h Werna aj hm mullo k gulam hote
    Maharana amar Singh Ji k bare m sahi Ni btaya h Apne unhone bhi Apna wishesh koshal dekaya h ranbhumi m muglo ki 50 bdi bdi senao pr unhone adhikaar kr liya tha Jb tk wo rahe aurangzeb kuch Ni beegad paya mevad ka.
    Unke bad ki pidiyo k bare m mje Ni pta pr wo bhi EK bht ache or pratap jese he rana sidh hue the

    Reply
  • mangesh chavan
    December 13, 2015 at 1:13 pm

    जय सेवालाल जय राणाजी

    Reply
  • शुभम सिंह
    January 26, 2016 at 3:49 am

    हुकुम रावल एक उपाधि हे जिसको कोई भी महान राजा धारण कर सकता हे जैसे सिसोदिया राणा कि उपाधि धारण करते थे

    सिसोदिया पहले गोहिल थे बाद में सिसोदिया हो गए ओर

    बप्पा रावल का वंश गहलौत ओर गोहिल था

    गहलौत कि शाखा

    . अहाडिया गहलौत
    अहाड नामक स्थान पर बसने के कारण यह नाम हुआ।

    2. असिला गहलौत
    सौराष्ट्र में बप्पा के पुत्र ने असिलगढ का निर्माण अपने नाम असिल पर किया जिससे इसका नाम असिला पडा।

    3. पीपरा गहलौत
    बप्पा के एक पुत्र मारवाड के पीपरा पर आधिपत्य पर पीपरा गहलौत वंश चलाया।

    4. मागलिक गहलौत
    लोदल के शासक मंगल के नाम पर यह वंश चला।

    5. नेपाल के गहलोत
    रतन सिंह के भाई कुंभकरन ने नेपाल में आधिपत्य किया अतः नेपाल का राजपरिवार भी मेवाड़ की शाखा है।

    6. सखनियां गहलौत
    रतन सिंह के भाई श्रवण कुमार ने सौराष्ट्र में इस वंश की स्थापना की।

    7. सिसौद गहलौत
    कर्णसिंह के पुत्र को सिसौद की जागीर मिली और सिसौद के नाम पर सिसौदिया गहलौत कहलाया

    सिसौदिया वंश की उपशाखाएं
    चन्द्रावत सिसौदिया
    यह 1275 ई. में अस्तित्व में आई। चन्द्रा के नाम पर इस वंश का नाम चन्द्रावत पडा।

    भोंसला सिसौदिया
    इस वंश की स्थापना सज्जन सिंह ने सतारा में की थी।

    चूडावत सिसौदिया
    चूडा के नाम पर यह वंश चला। इसकी कुल 30 शाखाएं हैं।[

    शक्तावत

    राणावात

    ओर भी हे

    Reply
  • jitendra singh
    March 17, 2016 at 9:04 pm

    jai hoo mewad ka jish bhumi ne ase saputara jeane……..jai mewad , jai rajasthan , jai rajputana…….

    Reply
  • Sher Singh Rana
    April 24, 2016 at 7:02 pm

    Ham bhi Sher Singh Rana h ….Moka milega to Jarur Dharm. Ki Rakha karenge …jai Bhawani ……Jai Rajputana!

    Reply
  • Rahul Singh rajput...
    May 2, 2016 at 11:57 am

    Jai Rajputana
    Ak bano nek nano……
    Jai mewad

    Reply
  • Vijay Yogi "Gehlot"
    May 16, 2016 at 2:50 am

    Jai ho Rana Bappa Rawal Yogi Harit Rishi who blessed Bappa and founder and established the Eklingnath Bhagwan and named Mewarnath. The frist priest were Harit Rishis sons & grandsons were Gehlot Nath Yogees and thereafter migratted to Bhadreshwar and stated there the temple of god Bhairav nath f9r this they made arrangement of eternal and immortal flame from Bhairavgarh ( now known as KAPASAN in Chittorgarh Distt.)to provoke the power of god and siddhies. Thenafter their grandsons remained since 1330 and till continued as sebayat.

    Reply
  • sanjay rana
    May 24, 2016 at 3:03 pm

    Jai maharana pratap….. jai rajputana

    Reply
  • rajat
    June 3, 2016 at 9:48 pm

    Jai RAjpuTaNa…………….

    Reply
  • Rahul badal
    June 27, 2016 at 3:51 am

    पद्मिनी की सुंदरता पर जिसका मन ललचाया था।।। ले करके सेना ख़िलजी चित्तोड़ पे चढ़ कर आया था।।। जीत नहीं पाया था जब वो तलवारो और तीरो से।।। खेल रचया धोके का तब चित्तौड़ी वीरो से।। मेवाड़ी रणबांकुलो ने दी आहुति प्राण की।।। सतियो ने जोहर व्रत कर जान बचाई आन की।।।
    जान बचाई आन की।।।
    सीर पर अपने कफ़न बांधकर शत्रु को ललकारा था।। और नहीं कुछ प्यारा प्यारा आजादी का नारा है।।।
    हर हर हर हर हर महादेव।।। जय चित्तोड़।। जय एकलिंग दिवान।। जय मेवाड़।।

    Rahul badal from chittorgarh

    Reply
  • shivraj singh ranawat
    July 5, 2016 at 11:50 am

    जय महाराणा प्रताप

    Reply
  • shivam tonk
    July 18, 2016 at 10:19 am

    Jai Marana pratap jai mewar

    Reply
  • raj pali
    July 24, 2016 at 11:00 pm

    jai marana pratap ke jai ho

    Reply
  • Shyam Maheshwari
    July 26, 2016 at 2:13 pm

    This historical information is very useful for existing generation. We can’t forget the secrifice of Maharana Pratap for the Mewar Estate and Akhand Bharat.

    Reply
  • Rakesh suda
    August 10, 2016 at 10:32 pm

    जय हो ऐसे महानं वीर योद्धाओ की
    सुडा वंश के राकेश सुडा

    Reply
  • Sokin dhakar
    September 11, 2016 at 11:25 pm

    Jai mewar

    Reply
  • dwarka prasad sain
    September 17, 2016 at 1:34 pm

    jai ho veer maharana pratap ki

    Reply
  • Kumarsing Rajput (Jibhu)
    September 19, 2016 at 12:47 am

    Jay Maharana Pratap .
    .

    Reply
  • harish chandra
    September 19, 2016 at 11:04 pm

    nice information

    Reply
  • रोहित सिसोदिया
    October 25, 2016 at 11:58 pm

    नमन करता हूँ मैं मेवाङी सरदारो को और नमन करता हूँ हमारे इतिहासकारो को जिन्होने हमे ऐसी देशभक्ती जगाने वाली घटनाऐ बतायी ।।
    ।। रोहित सिसोदिया जोधपुर ।।

    Reply
  • Dhavalsinh sisodiya...
    October 26, 2016 at 8:37 pm

    Jay ho dada bapu maha rana pratap ane sisodiya vansh na kuldevi ane kulldev no….

    Reply
  • arjun singh chouhan
    November 2, 2016 at 3:01 pm

    jai mewar jai rajputana

    Reply
  • yuvraj singh jhala. from gogunda
    November 26, 2016 at 11:29 pm

    Maharana Pratap Is my idol

    Reply
  • pradeep shah
    February 11, 2017 at 9:36 pm

    garb hota h hme apne asp pr k hm maharana ki family se belong krte hai bhaiyo garb se kho jay maharana pratap ki…..

    Reply
  • ajay jadon thakur
    February 15, 2017 at 8:45 pm

    jai maharana jai ho rajputana

    Reply
  • Surjit singh
    April 17, 2017 at 1:53 pm

    Nice gk ….jai maharana .jai mewar

    Reply
  • PANKESHSINGH SISODIYA
    April 20, 2017 at 8:20 pm

    JAI MAHARANA PRATAPSINGH JAI RAJPUTANA

    Reply
  • pavan pagare
    May 17, 2017 at 2:09 am

    jai mewar jai maharana pratap rajputana

    Reply
  • BHUVAN CHATURVEDI
    September 1, 2017 at 12:41 am

    There is a mistake in Jagat Singh II’s biography. Shahjahan, or Khurram, came much before his time. It should be under Jagat Singh I.

    Reply
  • Rachit Sisodia
    September 6, 2017 at 1:08 pm

    Jai MAHARANA PRATAP…….

    Reply
  • Shashi kant deo
    February 13, 2018 at 8:29 pm

    Jai Rajputana

    Reply
  • Lokesh Choudhary
    June 1, 2018 at 1:07 pm

    Prtap is a very good man kisne muglo ki adhinta saweekar nii ki thi

    Reply

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