NATIONAL SEMINAR : REVOLUTION IN INDIAN BROADBAND TECHNOLOGY

Inspired from “Digital India Program” launched on 1 July,2015 by Honorable PM of India Narendra Modi, a One Day National Seminar on Broadband Technology in ESDM sector : Indian perspectives was organized in Electronics and communication department of CTAE, MPUAT Udaipur. Chief Patron Dr. P.K. Dashora Honorable Vice Chancellor MPUAT Udaipur advised students of Electronics and Communication department to establish the knowledge of communication of ancient India. He focused on utilizing the electronics and communication  technologies to make the easy life of farmer. Senior director of DietY and Dgital India scheme Dr. B.M. Baveja discussed about the sectioned plans under Digital India programme. He also stated that up to 2017 approximately 100 thousand cr. rupees will be invested and near about 2.5 lac villages will be benefited by Broadband facilities. He also congratulated the project coordinator and head of department Dr. Sunil Joshi for running various projects on wireless broadband communication, which will beneficial for India.  Dr. Baveja insured that govt. will provide necessary grant for various research in agro-electronics field.

Broadband Technology in ESDM

Chief Technical adviser Prof. H.M. Gupta IIT Delhi express his concern over the lack of research in the field of IC designing, photonics and robotics in India. He emphasized to develop user friendly and reliable technique. Prof. Sandeep Sancheti, President of Manipal University stated that villages can be connected to broadband only through wireless means.

Broadband Technology in ESDM

Broadband Technology in ESDM

Broadband Technology in ESDM

Dr. B.P. Nandwana, Dean CTAE had elaborated the running agriculture projects in CTAE. Dr. Sunil Joshi, Head of department Electronics and Communication stated that India is one of the fastest growing markets of electronic products in the world. Till today, we are solely consumers of electronic products and do not have indigenous manufacturing. The growth in Electronic System Design and Manufacturing (ESDM) sector is expected to generate a real boom in core electronics sector by year 2020, through an anticipated FDI of Millions of Dollars in electronic manufacturing. The proceeding work conducted by Dr. Navneet Agarwal and vote of thanks was presented by Dr. P.C, Bapna.

सीटीएई में ’टेक फेस्ट 2014: गोल्ड फियेस्टा’ का आगाज

 उदयपुर, 31 मार्च 2014 ! महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विष्वविद्यालय के संगठक, प्रौद्योगिकी एवं अभियान्त्रिकी महाविद्यालय की स्थापना के स्वर्ण जंयती वर्ष के कार्यक्रमों के अन्र्तगत 3 अप्रेल 2014 से 7 अप्रेल 2014 तक तकनीकी एवं सांस्कृतिक संगम ‘टेक फेस्ट गोल्ड फियेस्टा’ का आयोजन किया जायेगा। गोल्ड फियेस्टा 2014 मेें होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिश्ठाता डा.बी.पी.नन्दवाना ने बताया कि पिछली बार की तरह इस बार भी अभियांत्रिकी विद्यार्थियों के कल्चर मीट ईन टेक्नीकल टच ‘‘गोल्ड फियेस्टा’’ में दी जाने वाली विभिन्न प्रस्तुतियों की प्रविश्टियों का आॅनलाइन पंजीकरण किया जायेगा। छात्रों के तकनीकी कौषल को दर्षाने हेतु रोबोरेस की प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा और विजेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया जायेगा।

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‘गोल्ड फियेस्टा 2014’ के सफल आयोजन हेतु आठ कमेठियों का गठन किया गया है। 3 से 5 अप्रेल 2014 तक की सभी प्रतियोगिताएं एवं आॅडिषन सीटीएई में होंगे एवं मुख्य संास्कृतिक कार्यक्रम 7 अप्रेल को सुबह 9 बजे से मोहनलाल सुखाडि़या विष्वविद्यालय के सभागार में होंगे।
प्रोफेसर त्रिलोक गुप्ता, सलाहकार सीएलएसयू एवं डा. मुरतजा अली सलोदा, सहायक अधिश्ठाता छात्र कल्याण ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 3 अप्रेल को एकल नृत्य, समूह नृत्य, एकल गायन, समूह गायन, वाद्य़यंत्र, फेषन षो, हिन्दी एवं अंग्रेजी वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के आॅडिषन लिए जायेंगे। दिनांक 4 अप्रेल को नुक्कड़ नाटक, रोबोरेस, काउन्टर स्ट्राइक, ट्रेजर हंट, हिन्दी एवं अंग्रेजी वाद-विवाद, आषुभाशण, रंगोली, कार्टून मेकींग, ब्रेक द कोड़, काव्य पाठ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। 5 अप्रेल को नीड फोर स्पीड, वेब पेज डिजाईन, फोटोग्राफी, प्रष्नोत्तरी, मूवी मेनिया, एडमेड, पेपर प्रजेन्टेंषन, ब्रिज मेकिंग, मुख चित्रण और क्ले माॅडलिंग तथा 7 अप्रेल को मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में एकल गायन, एकल नृत्य, समूह नृत्य, समूह गायन, वाद्ययंत्र एवं फेषन षो आदि का आयोजन मोहनलाल सुखाडि़या विष्वविद्यालय के सभागार में किया जायेगा।
सीएलएसयू के अध्यक्ष मुकेष गुर्जर ने बताया कि प्रतियोगिताओं को लेकर सभी छात्र अत्यधिक उत्साहित है और कुषलता पूर्वक अपने तकनीकी एवं सांस्कृतिक कला कौषल को प्रदर्षित करने हेतु विभिन्न तैयारियों में जुटे हुए हैं ।

सी.टी. ए. ई. में कृषि अभियान्त्रिकी के 48वें राष्ट्रीय अधिवेषन का समापन

न्यूनतम जुताई से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सभंव

उदयपुर, 23 फरवरी. सी.टी.ए.ई सभागार में भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद् के 48 वें राष्ट्रीय अधिवेषन एंवम संरक्षित कृषि में अभियान्त्रिकी सहभागिता पर तीन दिवसीय संगोष्ठी का आज समापन हुआ। इस राष्ट्रीय अधिवेषन में अमरीका, कनाडा, जापान, आस्ट्रेलिया आदि देषों के अभियान्त्रिकी विषेषज्ञों ने षिरकत की तथा भविष्य की कार्य योजनाऐं बनाने के लिये चर्चाओं में अपने अनुभवों साझा किए।

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समापन समारोह में मुख्य अतिथी, माननीय गुलाब चन्द जी कटारिया, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मन्त्री, राजस्थान सरकार ने ग्रामीण भारत के सषक्तिकरण एवं विकास में कृषि अभियन्ताओं को सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होनें सदन को मार्गदर्षन देते हुऐ पंचायती राज्य के माध्यम से ग्रामीण विकास व कृषि में अनोखी पहल करने का भी उल्लेख किया। ग्राम विकास के लिये गाँवो का सक्षक्तिकरण कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र के रुप में विकसित करने की आवष्यकता पर बल दिया।

उन्होनें कहा कि हमारे कृषि अभियन्ता व कृषि विषेशज्ञ देष के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई सम्भावनाऐं ढूढं़े ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रुक सके। उन्होनें कृषि अभियन्ताओं से खाद्य एवं प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन,जल प्रंबधन आदि क्षेत्रों में अन्वेषण के लिये कार्य करने को कहा। कृषि अभियन्ताओं के कार्यांे की सराहना करते हुऐ उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की जरुरतों के अनुसार तकनीकी संवर्धन एवं प्रौद्योगिकी का विकास करने पर बल दिया।

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समारोह के अध्यक्ष एम.पी.यू.ए.टी. के कुलपति प्रो. ओ. पी. गिल ने कहा कि विभिन्न जुताई पद्वतियाॅं, फसल उपज का बेहतर प्रंबधन एवं प्रक्रम, फसल अवषेषों के निस्तारण एवं रोपण पद्वतियां एवं कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं में न्यूनतम ऊर्जा खपत को ध्यान में रखते हुऐ कृषि अभियन्ताओं को ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सहभागिता बढ़ानी चाहिये। विभिन्न कृषि क्रियाओं में ऊर्जा खपत को कम करके जल एवं पोषक तत्वों को संरक्षित करना एवं प्राकृतिक स्त्रोतों एवं पर्यावरण की रक्षा करना वर्तमान में एक बड़ी चुनौती है।
”हरित – क्रान्ति“ काल में मुख्य अनुसंधान और विकास प्रयासों का केन्द्र था चयनित खाद्य अनाज व अन्य फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना किन्तु वर्तमान में नई मुष्किलों की मांग उत्पादकता एवं मुद्दे हैं स्त्रोतों का दक्ष उपयोग और उनके बचाव की उच्च प्राथमिकता जिससे संभालते हुऐ आगे बढ़ाकर उद्गम आवष्यकताओं की पूर्ति की जाये। विष्विद्यालय में अनेक यांत्रिक आर्दष व औजार विकसित किये हैं जिसमें से कई प्रदर्षन घर में रखे हैं। कुछ आर्दष उत्पादन इकाइयों तक पंहुच कर किसानों को लाभान्वित कर रहे हैं।
भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद् नई दिल्ली के अध्यक्ष डा. वी. एम. मियान्दे ने अपने उदबोधन में संरक्षित कृषि में अभियन्ताओं की सहभागिता पर विषेष आग्रह करते हुए कहा कि द्वितीय हरित क्रान्ति की रुपरेखा में बढ़ती हुई जनसंख्या के लिये अनाज उत्पादन में कृषि अभियन्ताओं का विषेष योगदान रहेगा। उन्होनें कहा कि भारतीय कृषि में विषमताओं को देखते हुए कृषि अभियन्ताओं के सामने बड़ी चुनौतियाँ है। देष के लघु एवम् मध्यम जोत वाले किसानांे तक तकनीकी हस्तान्तरण के साथ ही सामाजिक, अभियान्त्रिकी एवं तकनीकी सिफारिषों को सही प्रकार से लागू करने की आवष्यकता है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रौद्यागिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं संगोष्ठी के संयोजक डा. बी.पी. नन्दवाना ने सभी आगुन्तकों का स्वागत किया एवं महाविद्यालय की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर वर्ष पर्यन्त आयोजित किये जाने वाले एवमं महाविद्यालय के 50 वर्शो की उपलब्धियों की जानकारी देते हुऐ बताया कि भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद् के 48 वें वार्षिक अधिवेषन के तहत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘‘संरक्षित कृषि में अभियान्त्रिकी सहभागिता‘‘ में कुल 15 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इसमें फार्म मषीनरी एवं पावर के 2,खाद्य व डेयरी अभियान्त्रिकी के 2, नवीनतम ऊर्जा स्त्रोतों के 2 एवं जल मृदा सरंक्षण के 6 सत्रों में लगभग 200 अनुसंधान पत्रों का वाचन एवं चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त विद्यार्थीयों द्वारा प्रस्तुत षोध पत्र वाचन पर एक विषेश तकनीकि सत्र एवं एक सत्र पोस्टर पत्रों का आयोजित हुआ। उन्होने बताया कि इन सत्रों में देष विदेष से आये 200 से ज्यादा वैज्ञानिकों एवं अध्यापकों ने गहन चर्चा की ।
वार्षिक अधिवेषन के आयोजन के सहसचिव डा. अभय मेहता ने धन्यवाद ज्ञापित किया एवं कार्यक्रम का संचालन डा. दीपक षर्मा, प्राध्यापक एवं अध्यक्ष, नवीनीकरण ऊर्जा अभियान्त्रिकी विभाग ने किया। इस अवसर पर अमेरिका के डाॅ. ललित वर्मा, डाॅ. धरमेन्द्र सारस्वत, डाॅ. रमेष एस. तँवर, आस्ट्रेलिया के डाॅ. बसन्त महेष्वरी, जापान के

किषिड़ा, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड, नई दिल्ली के सदस्य डाॅ. वी.एन. षारदा, डाॅ. नवाब अली, पूर्व उप महानिदेषक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डाॅ. के.के. सिंह सहायक महानिदेषक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, पंतनगर (उत्तराखण्ड) के राष्ट्रीय प्रोफेसर डाॅ. टी.सी. ठाकुर एवं आई. आई. टी. खड़गपुर के डाॅ. वी. के. तिवारी भी उपस्थित थे।

सी टी ए ई में संरक्षित कृषि में अभियांत्रिकी सहभागिता पर राश्ट्रीय अधिवेषन आज

स्थानीय प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के तत्वाधान में भारतीय कृषि अभियंता परिषद का 48 वां राष्ट्रीय अधिवेषन 21 से 23 फरवरी, 2014 को आयोजित किया जा रहा है। अधिवेषन के दौरान संरक्षित कृषि में अभियांत्रिकी सहभागिता (म्दहपदममतपदह प्दजमतअंजपवदे पद ब्वदेमतअंजपवहतपबनसजनतम) विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की जायेगी। उपरोक्त विषय में जानकारी देते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. बी. पी. नंदवाना ने बताया की अधिवेषन एवं संगोष्ठी में कृषि अभियांत्रिकी संकाय पर शोध, अनुसंधान एवं षिक्षा विस्तार, उद्योग तथा रोजगार से जुड़े हुए एवं राष्ट्रीय, अन्र्तराष्ट्रीय संगठनो, विष्वविद्यालयों एवं उद्योगों में कार्यरत लगभग 500 अभियन्ता एवं वैज्ञानिक भाग लेगें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विष्वविद्यालय के कुलपति डा. ओ.पी. गिल रहेगे । कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि डाॅ. ललित वर्मा, अध्यक्ष, अमेरीकन कृषि अभियंता परिषद और डा. योषिसुके किशीडा, मुख्य सम्पादक ऐषीया,अफ्रीका और लेटिन अमेरीका में कृशि आधुनिकीकरण पत्रिका जापान होगे ।

 

भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद का 48 वां वार्षिक अधिवेषन उदयपुर में सी टी ए ई होगा मेजबान

उदयपुर। स्थानीय प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के तत्वाधान में भारतीय कृषि अभियंता परिषद का 48 वां राष्ट्रीय अधिवेषन 21 से 23 फरवरी, 2014 को आयोजित किया जा रहा है। अधिवेषन के दौरान संरक्षित कृषि में अभियांत्रिकी सहभागिता (म्दहपदममतपदह प्दजमतअंजपवदे पद ब्वदेमतअंजपवद ।हतपबनसजनतम) विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की जायेगी। उपरोक्त विषय में जानकारी देते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. बी. पी. नंदवाना ने बताया की अधिवेषन एवं संगोष्ठी में कृषि अभियांत्रिकी संकाय पर शोध, अनुसंधान एवं षिक्षा विस्तार, उद्योग तथा रोजगार से जुड़े हुए एवं राष्ट्रीय, अन्र्तराष्ट्रीय संगठनो, विष्वविद्यालयों एवं उद्योगों में कार्यरत लगभग 500 अभियन्ता एवं वैज्ञानिक भाग लेगें।
उल्लेखनीय हैं कि महाविद्यालय के स्थापना के स्वर्ण जयन्ति वर्ष के दौरान उपरोक्त अधिवेषन का आयोजन उदयपुर में किया जा रहा है जिसके दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में यथा प्रसंस्करण, दुग्ध एवं खाद्य अभियान्त्रिकी, फार्म मषीनरी एवं षक्ति अभियान्त्रिकी, मृदा एवं जल अभियान्त्रिकी, कृषि में ऊर्जा एवं अन्य सम्बधित विषयों पर 250,षोध पत्रों का वाचन भी किया जायेगा। अधिवेेषन के दौरान कृषि अभियान्त्रिकी विषयों पर नवीनतम एवं उल्लेखनीय कृषि यन्त्रो की प्रर्दषनी भी लगाई जायेगी। कार्यक्रम के संयोजन सचिव डाॅ. घनष्याम तिवारी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता हेतु विष्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. ओ. पी. गिल के संरक्षण में विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है अब तक हुई प्रगति का जायजा लेने हेतु भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आकोला महाराष्ट्र के पूर्व कुलपति डाॅ. वी. एम. मेंनडे, दिल्ली से महासचिव प्रो. अनिल कुमार, आंणद कृषि विष्वविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. डी. सी. जोषी, परिषद के राजस्थान इकाई के अध्यक्ष डा. अभय महता, डाॅ. वाई. सी. भटट् ने विभिन्न कमेटियों के चेयरमेन से विचार विर्मष कर आवष्यक निर्देष दिये। अधिवेषन में षिरकत करने हेतु निम्न वैज्ञानिको अभियंताओं ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

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अधिवेषन की थीम
कृषि अभियान्त्रिकी का ग्रामीण विकास एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण में महत्व

कृषि प्रधान देष भारत के समक्ष सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए कम लागत मूल्य पर अधिक अनाज उत्पादन की चुनौती बढ़ती जा रही है। लघु जोत सीमा, कृषि श्रमिक अनुपलव्धता, कृषि में विद्युत की कमी, मौसम आधारित कृषि उपज में अनिष्चितता आदि अनेक समस्याऐं भारतीय कृषक समुदाय को कृषि रोजगार से विमुख कर रही है। ऐसी सभी परिस्थितियों में उन्नत कृषि यन्त्रों का समुचित प्रयोग आवष्यक हो गया है।
कृषि अभियान्त्रिकी से सम्बधित विभिन्न पहलुओ के माध्यम से आधुनिकतम तकनीक के उपयोग का बढ़ावा दिया जाना सम्भावित है जिससे संसाधनो का संरक्षण, बाह्य ग्राह्य (Input) निवेष की अधिकतम क्षमता, उपज में बढ़ोतरी, एवं सतत विकास की अवधारणा को बल मिल सकता है। प्रस्तावित कृषि अभियान्त्रिकी अधिवेषन में इन सब विषयों पर उपस्थित महत्वपूर्ण प्रतिभागियो द्वारा गहन विचार विर्मष कर, अनुषंसाओं को स्वरुप प्रदान किया जायेगा। जो कि भविष्य में भारतीय कृषि नीति बनाने में सहायक सिद्व होगी।