उदयपुर, 11 मर्इ।सुनियोजित विकास की अनदेखी के होंगे गम्भीर परिणाम – उदयपुर के सुनियोजित विकास में अब तक हुर्इ गलतियों को सुधारा नहीं गया तो आने वाली पीढि़यां हमें क्षमा नहीं करेंगी। यह बात शनिवार को उदयपुर विचार मंच, महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान एवं नारायण सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर नगर की स्थापना के 461 वें दिवस पर हिरण मगरी सेक्टर-4 के मानव मंदिर में आयोजित ”विचार-गोष्ठी में मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविधालय के कुलपति प्रो. आर्इ.वी. त्रिवेदी ने प्रमुख अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुषमा को बचाये रखने के काम को जन आन्दोलन का रूप देना होगा। इसमें विश्वविधालय अपनी सकारात्मक भूमिका के साथ सदैव तैयार रहेगा। नगर निगम निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह शक्तावत ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वतन्त्रता के बाद उदयपुर के नियोजित विकास की अनदेखी का परिणाम ही आज के उदयपुर की समस्या है।

Meeting on 461th Foundation Day of Udaipur Meeting on 461th Foundation Day of Udaipur

बेतरतीब विकास के लिए प्रशासन के साथ-साथ एक हद तक जनता भी जिम्मेदार है। अपने शहर के व्यवसिथत विकास में पूरी तरह रचनात्मक सोच के साथ आगे आना होगा। नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक श्री कैलाश मानव ने कहा कि हमकों इस शहर ने बहुत कुछ दिया है अब बारी हमारी है। हम भी ऐसा कुछ करें कि यह ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुषमा से आवेषिटत शहर अपने गौरव और गरिमा को कायम रखते हुए नित नया निखार पाता रहे। इससे पूर्व नारायण सेवा संस्थान की ओर से अध्यक्ष डा. प्रशान्त अग्रवाल, उदयपुर विचार मंच की ओर से चोसरलाल कच्छारा व महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान की ओर से महासचिव श्री भंवर सेठ ने अतिथियों का स्वागत किया। कवयित्री श्रीमती रामप्यारी भटनागर ने र्इश वंदना प्रस्तुत की। विशिष्ठ अतिथि प्रो. नरपतसिंह राठौड़ ने कहा कि नदियों को मोड़ने और जोड़ने की हम आज सिर्फ बातें ही करते है जबकि यह कार्य उदयपुर के महाराणाओं ने बहुत पहले ही शुरू कर दिया था। जिसे अब आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सन 1670-80 के बीच उभेश्वर नदी जो पहले छोटे और बडे मदार में जाकर गिरती थी उसे धार गांव के पशिचम में मोड़कर मोरवानी से जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि उदयपुर बेसिन में औधोगिक इकाइयों की स्थापना से काफी नुकसान हुआ है। प्रो. एस.के. गुप्ता ने सेटेलार्इट टाउन उदयपुर के बाहर गोगुन्दा, मावली, वल्लभनगर आदि क्षेत्रों में विकसित करने और उदयपुर नगर को विश्व धरोहर की मान्यता दिये जाने पर जोर दिया। भंवरसेठ ने कहा कि इस शहर की आर्थिक धूरी पर्यटन है जिस पर पूरे सोच विचार के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए। शहर नगर निगम बन गया है, अब इसे बी-2 श्रेणी का दर्जा भी मिलना चाहिए। दिलीपसिंह राठौड़ ने पर्यटन विकास के कुछ आधाभूत बिन्दुओं पर चर्चा की तो प्रो. सज्जनसिंह राणावत ने कहा कि उदयपुर के भविष्य को सुन्दर और सुखद बनाने के लिए इसका अतीत ही आधार हो सकता है। यहां की झीलों और हेरिटेज र्इमारतों और शहर का संरक्षण किया जाना चाहिए। समारोह के प्रमुख संयोजक श्री विष्णु शर्मा ”हितैषी ने उन समस्याओं का जिक्र किया जो शहर के अतीत को धुन्धला करने पर तुली हैं। उन्होने गोष्ठी में भाग लेने वाले अतिथियों व नागरिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उदयपुर का हित चिन्तन प्रशासन के जिम्मे नहीं छोड़कर हम सब को एक राय होकर करना होगा। गोष्ठी का संयोजन श्री महिम जैने ने किया। संस्थान अध्यक्ष डा. प्रशान्त अग्रवाल व निदेशक श्रीमती वंदना अग्रवाल ने अतिथियों का मेवाड़ी पाग व उपरणा पहनाकर अभिनन्दन किया।

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