भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद का 48 वां वार्षिक अधिवेषन उदयपुर में सी टी ए ई होगा मेजबान

उदयपुर। स्थानीय प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के तत्वाधान में भारतीय कृषि अभियंता परिषद का 48 वां राष्ट्रीय अधिवेषन 21 से 23 फरवरी, 2014 को आयोजित किया जा रहा है। अधिवेषन के दौरान संरक्षित कृषि में अभियांत्रिकी सहभागिता (म्दहपदममतपदह प्दजमतअंजपवदे पद ब्वदेमतअंजपवद ।हतपबनसजनतम) विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की जायेगी। उपरोक्त विषय में जानकारी देते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. बी. पी. नंदवाना ने बताया की अधिवेषन एवं संगोष्ठी में कृषि अभियांत्रिकी संकाय पर शोध, अनुसंधान एवं षिक्षा विस्तार, उद्योग तथा रोजगार से जुड़े हुए एवं राष्ट्रीय, अन्र्तराष्ट्रीय संगठनो, विष्वविद्यालयों एवं उद्योगों में कार्यरत लगभग 500 अभियन्ता एवं वैज्ञानिक भाग लेगें।
उल्लेखनीय हैं कि महाविद्यालय के स्थापना के स्वर्ण जयन्ति वर्ष के दौरान उपरोक्त अधिवेषन का आयोजन उदयपुर में किया जा रहा है जिसके दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में यथा प्रसंस्करण, दुग्ध एवं खाद्य अभियान्त्रिकी, फार्म मषीनरी एवं षक्ति अभियान्त्रिकी, मृदा एवं जल अभियान्त्रिकी, कृषि में ऊर्जा एवं अन्य सम्बधित विषयों पर 250,षोध पत्रों का वाचन भी किया जायेगा। अधिवेेषन के दौरान कृषि अभियान्त्रिकी विषयों पर नवीनतम एवं उल्लेखनीय कृषि यन्त्रो की प्रर्दषनी भी लगाई जायेगी। कार्यक्रम के संयोजन सचिव डाॅ. घनष्याम तिवारी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण आयोजन की सफलता हेतु विष्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. ओ. पी. गिल के संरक्षण में विभिन्न कमेटियों का गठन किया गया है अब तक हुई प्रगति का जायजा लेने हेतु भारतीय कृषि अभियन्ता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आकोला महाराष्ट्र के पूर्व कुलपति डाॅ. वी. एम. मेंनडे, दिल्ली से महासचिव प्रो. अनिल कुमार, आंणद कृषि विष्वविद्यालय के अधिष्ठाता डाॅ. डी. सी. जोषी, परिषद के राजस्थान इकाई के अध्यक्ष डा. अभय महता, डाॅ. वाई. सी. भटट् ने विभिन्न कमेटियों के चेयरमेन से विचार विर्मष कर आवष्यक निर्देष दिये। अधिवेषन में षिरकत करने हेतु निम्न वैज्ञानिको अभियंताओं ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

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अधिवेषन की थीम
कृषि अभियान्त्रिकी का ग्रामीण विकास एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण में महत्व

कृषि प्रधान देष भारत के समक्ष सीमित संसाधनों का उपयोग करते हुए कम लागत मूल्य पर अधिक अनाज उत्पादन की चुनौती बढ़ती जा रही है। लघु जोत सीमा, कृषि श्रमिक अनुपलव्धता, कृषि में विद्युत की कमी, मौसम आधारित कृषि उपज में अनिष्चितता आदि अनेक समस्याऐं भारतीय कृषक समुदाय को कृषि रोजगार से विमुख कर रही है। ऐसी सभी परिस्थितियों में उन्नत कृषि यन्त्रों का समुचित प्रयोग आवष्यक हो गया है।
कृषि अभियान्त्रिकी से सम्बधित विभिन्न पहलुओ के माध्यम से आधुनिकतम तकनीक के उपयोग का बढ़ावा दिया जाना सम्भावित है जिससे संसाधनो का संरक्षण, बाह्य ग्राह्य (Input) निवेष की अधिकतम क्षमता, उपज में बढ़ोतरी, एवं सतत विकास की अवधारणा को बल मिल सकता है। प्रस्तावित कृषि अभियान्त्रिकी अधिवेषन में इन सब विषयों पर उपस्थित महत्वपूर्ण प्रतिभागियो द्वारा गहन विचार विर्मष कर, अनुषंसाओं को स्वरुप प्रदान किया जायेगा। जो कि भविष्य में भारतीय कृषि नीति बनाने में सहायक सिद्व होगी।