शहर में साइकल मैराथन का आयोजन

28 जुलाई 2014ए उदयपुर। हरावल साइकल इनिशिएटिव द्वारा रविवार को शहर में सुबह छरू बजे पेंतीस किलोमीटर लंबी हरावल साइकल मैराथन मॉनसून का आयोजन किया गया। संयोजक मनीष कटारिया और विशाल धाभाई ने चेटक सर्कल स्थित सूचना केंद्र से मैराथन को हरी झंडी दिखाई। यह मैराथन सहेलियों कि बाड़ीए फतेहसागरए बड़ी तालाबए बरडा गाँवए ऊबेशवरजी रोडए रामपुरा चौराहाए सज्जंगढ़ रोड होते हुए राजीव गांधी पार्क के सामने समाप्त हुई और इसमें हिस्सा लेने वालों ने शहर की खूबसूरत वादियों का लुत्फ उठाया। हरावल मैराथन में करीब डेढ़ सौ से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और शहर को प्रमोट साइकलिंग का नारा दिया।

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मोण् रिज़वान मंसूरी ने बताया कि दस वोलंटीयर्स ने प्रतिभागियों कि सुरक्षा एवं साइकल के रखरखाव का ध्यान रखा एवं उनके मनोरंजन और रिफ्रेशमेंट के लिए बड़ी तालाबए बरडा गाँव और रामपुरा चौराहे पर चेक पॉइंट्स रखे गए। संगठन द्वारा साल कि यह तीसरी मैराथन थी और इसके द्वारा ये लोगों में साइकलिंग के उपयोग को बढ़ावा देना चाहते है ताकि शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम किया जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पर्यावरण को साफ रखा जा सके। आकर्षण कि बात यह थी कि इसमें दस साल के बच्चों से लेकर साठ साल के बुजुर्गों ने हिस्सा लिया और सभी ने अंत तक एक दूसरे का उत्साह बढ़ाया। संयोजक ने बताया मैराथन के दौरान प्रणव आयुर्वेदिक सेन्टर ने प्रतिभागियों को हर्बल टी पिलाईए सलोनी हर्बल ब्युटि सेन्टर ने फल ओर ग्लूकोज रखा। अंत में शिक्षांतरए मिलेट्स ऑफ मेवाड़ए पुकार ग्रुप और नाट्यान्श संस्थान ने मिलकर प्रतिभागियों को ओर्गेनिक भेल एवं कूकीज़ दी और उनका मनोरंजन किया। मनीष ने बताया कि हरावल साइकल इनिशियटिव शहर में आगे भी मैराथन करते रहेंगे और जल्द ही गिफ्ट राइड साइकल का प्रमोशन करेंगे जिसके तहत लोगों को शहर घूमने के लिए मुफ्त में साइकल दी जाएगी और गिफ्ट कल्चर को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

‘‘गधे’’ के मंचन के साथ नाट्य कार्यशाला ‘तराश’ का समापन

उदयपुर। 30 जुन 2014  नाट्यांश सोसायटी आॅफ ड्रामेटिक एण्ड परर्फोमिंग आर्ट्स के द्वारा 21 दिवसिय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला ‘‘तराश’’ का समापन 29 जून को हुआ। समापन समारोह में इस कार्यशाला के 20 प्रतिभागियों ने नाटक गधे का मंचन किया गया। ज्यादातर प्रतिभागीयों ने पहली बार किसी नाट्य प्रस्तुति में हिस्सा लिया है। नाटक के मंचन के उपरान्त प्रतिभागियों को नाट्यांश द्वारा प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।

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नाट्यांश द्वारा संचालित इस कार्यशाला में बच्चों ने रंगमंच और इस से सम्बन्धित बारिकियों को जाना। और इन बारिकियों को सही से समझाने के लिये प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर द्वारा लिखित नाटक ‘गधे’ को तैयार किया गया। यह नाटक वर्तमान में मोजुद शिक्षा प्रणाली और उसके दुष्परिणामों पर एक व्यंग्य नाटक है।
‘गधे’ नाटक एक बाल व्यंग्य नाटक है जो वर्तमान में व्याप्त परम्परागत शिक्षा प्रणाली पर सवाल खडा करता है। तोते की तरह अच्छी तरह से रटकर सभी अपनी ‘‘अंकतालिका’’ के नम्बरों को बढना चाहते है और बढा भी रहे है। परन्तु उनका व्यावहारिक एवं सामाजिक ज्ञान का स्तर लगातार घटता जा रहा है।

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यह नाटक ऐसी ही शिक्षा प्रणाली की कमजोर बिन्दुओं पर एक कटाक्ष है। 60 साल पहले लिखा, और खेला गया यह नाटक आज भी सटीक और सच्चा मालुम होता है और यह कहने में कोई दोराय नही कि आज की मौजुदा शिक्षा प्रणाली आदमी को सिर्फ ‘‘गधे’’ बना रही है। समय और अपने अनुभव से हमने जो कुछ सिखा है उसे लिपिबद्ध कर किताबों मे डाल दिया है। और वो किताबें अब सिर्फ बच्चों के कान्धे का बोझ बढा़ रही है और उसकी सिखने की प्रवृत्ति में अवरोध लगा रही है।
यह नाटक किताबों के खिलाफ नही है बल्कि यह नाटक आपके और हमारे पढने और पढाने की तरीके और पुरानी सोच के खिलाफ है, उस मानसिकता के खिलाफ है जो कहती है कि अंक तालिका के सर्वाधिक अंक शिक्षा है और ज्ञानी होने की परिभाषा है।
नाटक में गवर्नर के किरदार में श्लोक पिंपलकर, मंत्री – अमित नागर और आयुष माहेश्वरी, दरबारी – हिमजा पाण्डे और ऋचा अहारी, गुरूजी – अब्दुल मुबिन खान पठान, धोबी – चेतन मेनारिया, धोबन – नीति शर्मा, बच्चों की टोली में क्रमशः मोहम्मद रिज़वान मंसुरी, भव्यन खोखावत, संस्कार नागदा, हरिजा पाण्डे, निषाद पाण्डे, यामिनि चैहान, रितू सोनी, और शहरी के रूप में नेहा पुरोहित और आस्था बामनिया ने अपने अभिनय से दर्शको का मन मोह लिया।

नाटक के संयोजक मोहम्मद रिज़वान मंसूरी ने बताया कि नाटक का निर्देशन अश्फ़ाक नुर खान पठान ने किया है। नाटक के प्रस्तुतकर्ता अमित श्रीमाली है। संगीत सयोजन और संचालन पं. अवध किशोर पाण्डे और राजेश ईशोर का रहा। प्रकाश परिकल्पना में महेन्द्र डांगी, मंच सज्जा – इरफान शेख, भावेश जैन, विशाल राज वैष्णव, वेशभुषा – रेखा सिसोदिया और योगिता सिसोदिया, रूप सज्जा – नेहा पुरोहित, स्नेहलता चैहान, खुशनुमा मंसूरी एवं सहायक के रूप में कुलश्रेष्ठ सिंह, नितेश, प्रतिक, मोहक और भुवनेश का भी सहयोग प्राप्त हुआ। नाट्यांश की इस प्रस्तुति में काॅलेज आॅफ म्युजि़क, सी. पी. एस. का विशेष योगदान रहा।

नुक्कड़ नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ से लोगों को किया जागरूक

उदयपुर । विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर उदयपुर की नाट्य संस्था नाट्यांश एवं पुकार के युवाओं ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखाते हुए उदयपुर के विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण किया। दोनो संस्थाओं ने उदयपुर के हिरणमगरी सेक्टर 9, सेक्टर 6, भुवाणा, मुल्लातलाई, सेन्ट्रल जेल इत्यादि क्षेत्रों में पौधारोपण किया गया।

नुक्कड़ नाटक के बाद पुकार एवं नाट्यांश की तरफ से सभी आमजन को पौधे बांटे गये एवम् शपथ दिलवाई गई कि वे अपने आसपास के सभी पौधों का सम्मान एवं ख्याल रखेगें ।

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शाम को नाट्यांश के युवा रंगकर्मियों ने अपने नुक्कड़ नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ के माध्यम से सवाल उठाये। वर्तमान में पर्यावरण की नाजु़क हालात को देखते हुए पेड़ो को बचाने एवं पेड़ो को लगाने का संदेश दिया। नाट्यांश द्वारा आयोजित यह नुक्कड़ नाटक व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पर्यावरण पहँुचायी गयी हानियो पर आधारित है।
मानव जाति सभी कुछ जानते हुए भी प्राकृतिक संपदाओं का शोषण कर रही है तथा इस शोषण से भविष्य मे आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से अनजान बनी हुई है। मानव जाति की इसी सोई सोच को बदलने के लिए और लोगो को जागृत करने के लिए नुक्कड़ नाटक का प्रभावी मंचन किया गया।
नाटक मंचन फतेहसागर की पाल पर हुआ। साथ ही उदयपुर वासियों को गुलमोहर, अमरुद, जामुन और शिशम के पौधो का निशुल्क वितरण कर के पर्यावरण के रक्षक, पेडो़ को बचाने एवं नये पेड़ लगा कर उनके बड़े होने तक पेड़ो की देखभाल का संकल्प लिया।

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इस नुक्कड़ नाटक के संयोजक नुरूननिसा ने बताया की नाटक लेखन का कार्य अमित श्रीमाली एंव अशफाक नुर ख़ान ने मिल कर किया है। नाटक के कलाकारों में मोहम्मद रिज़वान, शुभम शर्मा, नेहा पुरोहित, श्लोक पिंपलकर, अश्फाक नुर खान पठान, जोहान शेख एवं महेन्द्र डांगी, अब्दुल मुबिन खान पठान, विशाल राज, मोहक, शिखा भोलावत, भुवनेश, आयुष, दर्शन आदि थे।
नाटक का सारांश
नाटक ‘‘जीवन की दुकान’’ की चार दोस्तों की कहानी है। जिनमे से तीन दोस्त एक व्यवसाय की योजना बनाते है। ये तीनों दोस्त आॅंक्सीजन मेकिंग फेक्ट्री के फायदे के लिए दुनिया के तमाम जंगल एंव पेडों को तबाह करने की योजना बनाते है। किन्तु इनका चैथा दोस्त इन तीनों को पेडा़े के महत्व के बारे में समझाता है। साथ ही बिना पेडा़े के भविष्य की एक झलक भी दिखाता है। बिना पेडो के भविष्य को देखने के बाद तीनों दोस्त पेड़ो को काटने के बारे मे सोचना छोड़कर पेडा़े को बचाने के बारे मेे सोचना शुरू कर देते है।

कर्तव्यों को याद दिलाता ‘‘परेड़ थम’’

26 जनवरी, 2014। उदयपुर। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य मे फतह सागर की पाल पर नाट्यांश के द्वारा एक नुक्कड़ नाटक ‘‘परेड़ थम’’ का मंचन किया गया। यह नाटक भारतीय संविधान में बताये गये आम आदमियों के राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों पर आधारित था।

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आज हम अपने हक और अधिकारों के बारे में तो हमेशा लडतें है, आवाज़ उठाते है, पर क्या कभी हम अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों के बारे में सोचते है और क्या हम ये जानते भी है कि भारतवर्ष के संविधान हमारे क्या क्या कर्तव्य बताये गये है? शायद नही।
भारतीय संविधान में आम आदमी के लिये ग्यारह कर्तव्यों का उल्लेख है जिनका पालन वर्तमान में कोई नही करता, यहा तक की 26 जनवरी हमारे देश में एक राष्ट्रिय अवकाश, ड्राय डे और स्कुलो में सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रह गयी है।
नाट्यांश द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक के कलाकारों में प्रतिक पटेल, हिरांश देवपुरा, उदय सिंह राव, निखिलेश खत्री, विशाल राज वैष्णव, रेखा सिसोदिया, अमित श्रीमाली, मोहम्मद रिजवान मंसुरी एवं अश्फाक़ नूर खान पठान ने अपने अभिनय की छाप छोडी। इस नाटक का लेखन अश्फाक़ नूर खान पठान ने किया।

‘‘आज़ादी का बटँवारा’ – फतह सागर की पाल पर

66 साल बाद हुआ ‘‘आज़ादी का बटँवारा’’ 

उदयपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फतह सागर की पाल पर नाट्यांश के द्वारा एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। ‘‘आज़ादी का बटँवारा’’ नामक यह नाटक भारत की वर्तमान की स्थितियों पर आधारित था।

Fatehsagar 15 अगस्त 1947 को हमारें देश को आज़ादी मिली थी, परन्तु सच्चाई कुछ और ही हैं। हमारा हिन्दुस्तान आज़ाद तो हुआ पर तीन टुकड़ों के साथ। आज़ादी के 66 साल बाद बटँवारे की ये आग फिर भड़क रही हैं और 20 नये राज्यो की मांग सामने आई हैं।
पहले हम अंग्रेज़ो के गुलाम थे और अब हम भ्रष्टाचार, दहेज हत्या, कन्या-भ्रुण हत्या, बलात्कार, शहीदों की मौत पर होने वाली बयानबाज़ी, शान्ती वार्ताएं और राजनीति जैसी बुराईयों के गुलाम हैं। कलाकारो ने इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से एसी ही बुराईयों के खिलाफ आवाज़ उठाने का प्रयास किया हैं।
अन्त में भारत-पाक सीमा पर शहिद 5 भारतिय सिपाहीयो की दिवंगत् आत्मा की शान्ती के लिये 2 मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

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इस नाटक में राम प्रसाद बिस्मील, सुभद्रा कुमारी चैहान, पीयुष मिश्रा, गोपाल दास व्यास, सुधिर सक्सेना और प्रदीप पाठक की कविताओं का उपयोग किया गया है।
कलाकारों में शुभम शर्मा, मोहम्मद रिज़वान, विशाल राज वैष्णव, भारत कुमावत, जतिन नाहर, महेन्द्र ड़ांगी, अब्दुल मुबीन खान पठान, रेखा सिसोदिया एवं अमित श्रीमाली ने अपने अभिनय की छाप छोडी। साथ ही अश्फाक़ नूर खान पठान और सुधिर सिंह ने भी सहयोग किया। इस नाटक का लेखन अमित श्रीमाली ने किया। परिकल्पना और निर्देशन नाट्यांश द्वारा किया गया।

 

अमित श्रीमाली
संयोजक
नाट्यांश