क्या उदयपुर की इमारतें सूरत जैसे अग्निकांड का इंतज़ार कर रही हैं?

पिछले दिनों सूरत में लापरवाही और गैर ज़िम्मेदारी के चलते महाभयंकर अग्नि काण्ड हुआ जिसके चलते 22 बच्चो कि जान चली गयी। “पर ये तो सूरत में हुआ न! उदयपुर में क्या हुआ? कुछ नहीं! तो ध्यान देने की क्या ज़रूरत! नहीं?”

फिर अभी पिछले हफ्ते शहर में एम बी हॉस्पिटल रोड स्थित अलंकार प्लाज़ा बिल्डिंग में किराए पर संचालित मेडिसेंटर लैब के प्रथम तल पर गुरूवार तड़के 6 बजे आग लग गयी। आग का कारण शार्ट- सर्किट बताया गया है। करीब एक घंटे का समय और 7 दमकल गाड़ियां लगीं  आग पर पूरी तरह काबू पाने में। सुबह लैब बंद होने की वजह से जनहानी की कोई खबर नहीं है। पास ही पेट्रोल पंप होने के कारण दमकल विभाग ने एहतियात के तौर पर चार अतिरिक्त गाड़ियों का इंतज़ाम करवाया। शायद अकल्पनीय है कि अगर आग का पेट्रोल पंप की तरफ बढ़ना होता तो कितना बड़ा हादसा हो सकता था!

सूरत के भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन द्वारा सुध संभालते- संभालते भी शहर में हादसा हो ही गया। इस हादसे से पर तो बिना किसी हताहतों के काबू पा लिया गया पर क्या हर बार ऐसा होगा? उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? जब इस आग कि गर्मी प्रशासन तक पहुंची तब प्रशासन कि नींद खुली और पिछले दिनों इसी सुध के चलते शहर में शुक्रवार को शास्त्री सर्किल स्थित  विशाल मेगा मार्ट और शनिवार को सुखाड़िया सर्किल स्तिथ बिग बाज़ार को फायर फाइटिंग सिस्टम न होने और कुछ और भी सुरक्षा कारणों के चलते सीज़ कर लिया गया। अग्निशमन अधिकारी जलज घसिया का कहना है कि दोनों इमारतों के संचालकों को तीन बार नोटिस जारी किया गया था जिनके चलते उचित कदम उठाना तो दूर, उनका जवाब तक नहीं दिया गया। और वही हुआ 338 में से उन 282 नोटिस का भी ,जो नगर निगम ने शहर भर में भवनों का निरीक्षण  करके भेजे थे। शोध करके यह भी सामने आया कि 155 इमारतें हैं, जो नगर विकास प्रन्यास के अधीन आती हैं और जिनमें फायर फाइटिंग सिस्टम का अभाव है। इनकी सूची यूआईटी को भेज दी गयी थी परन्तु उनके द्वारा किसी भी प्रकार कि कार्यवाही नहीं की गयी है।

प्रशासन कि काबिलियत पर किसी को शक नहीं पर 2019 में जहाँ तकनीक आसमान छू रही है, क्या हम सिर्फ सेफ्टी सिस्टम जैसी आवश्यकताओं की वजह से सैकड़ो जानें दाव पर लगा सकते हैं ? हम जानते हैं  कि बिग बाज़ार और विशाल मेगा मार्ट जैसे नामचीन ब्रांड और इनकी ईमारतों में इतना सामान और भीड़ होती है एक बार अगर अग्निकांड जैसा कभी कुछ हो भी जाए तो जनहानि आग से ज़्यादा भगदड़ से होगी। और अगर नामचीन इमारतों का यह हाल है तो बाकी ईमारतों से हम क्या उम्मीद रखें? अब देखना यह है कि अब जो यह नींद खुली है, जो कार्यवाही चली है, जो फाइल बनी है, यह कितने दिन तक चलता है और इसके फलस्वरूप उदयपुर कितना “स्मार्ट” बनता है।