शहर के पहले मानव निर्मित मियावाकी जंगल की शुरुआत

उदयपुर: इस रविवार 6 साल से पर्यावरण के लिए कार्यरत पुकार फ़ाउंडेशन ने अपना 250वां रविवार हरित 250 के रूप में समर्पित किया। जिला शिक्षा अधिकारी उदयपुर व बंदूकवाला परिवार के सहयोग से संस्थान ने जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के परिसर में करीबन 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में जापानी विधि “मियावाकी” द्वारा शहर का पहला मानव निर्मित मियावाकी जंगल का निर्माण करने के लिए 351 पौधों का पौधरोपण किया गया जिसमें शहर के सभी वर्ग, क्षेत्र, व्यवसाय के 150 से अधिक लोगों ने स्वेच्छापूर्वक और पूरे उत्साह के साथ पौधरोपण कर श्रमदान किया। विशेषकर नमो विचार मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण रतलीया, ग्वालियर से रोहित उपाध्याय, जर्मनी से फ्रैंक, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ शोभालाल औदिच्य, मोइनी फ़ाउंडेशन, नाट्यान्श संस्थान, मर्सी लीग, उदयपुर ब्लॉग, ठालागिरी, दिया संस्थान, ब्लीस फ़ाउंडेशन, रॉबिन हूड आर्मी, आबु टाइम्स, नितांदु इवैंट की भागदारी रही।

मियावाकी विधि क्या है? – संस्थापक भुवनेश ओझा ने बताया कि यह नाम जापानी पर्यावरणविद् अकीरा मियावाकी के नाम पर रखा गया है जिन्होने इस विधि को ईजाद किया है जिससे प्राकृतिक रूप से 100 सालों में बनने वाले जंगल को 10 साल में ही बनाया जा सकता है। यह जंगल 30 गुना ज्यादा घने होते हैं जिससे कार्बन डाइऑक्साइड व हानिकारक सूक्ष्म कणों को यह सोखते है जो प्रदूषण कम करने का असरदार हल है। इस विधि के तहत विश्वभर में कहीं भी जंगल लगाना संभव है।

अरावली के पैतृक पौधों का रोपण – संस्था के सदस्य आशीष बृजवासी ने बताया कि पौधरोपण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि केवल अरावली पर्वतमाला के विलुप्त होते पैतृक पौधे जैसे रोंझ, कोटमबड़ी, पिलखन, गूँदी व गुग्गल साथ ही राज्य का राजकीय वृक्ष खेजड़ी व इन्हीं के साथ अन्य 37 प्रजातियों के 351 पौधों को लगाये गए।

दो साल तक करेंगे रखरखाव – मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शिवजी गौड़ ने बताया कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए संस्थान द्वारा यह एक अभिनव पहल है। पौधों का नियमित रूप रखरखाव जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय एवं पुकार संस्थान द्वारा कम से कम दो वर्ष तक किया जाएगा ताकि आने वाले समय में यह वृक्ष बनकर जैव विविधता में सुधार लाएँगे।