लो आ गयी लोहड़ी वे

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Happy lohri

पर्व त्यौहार का सीजन नए साल में फिर शुरू हो गया है. मौसम की नयी बहार के साथ लो जी…लोहड़ी आ ही गयी. पंजाब की शान- लोहड़ी अब सिर्फ पंजाब का त्यौहार नहीं रहा…  मकर सक्रांति से एक दिन पहले जिंदगी के हर लम्हे को जीने की सिख देने वाला ये त्यौहार अब पूरा देश उसी अंदाज़ में मनाता है.
बैसाखी त्यौहार की तरह लोहड़ी का सम्बन्ध यूँ तो पंजाब के गाँव, फसल और मौसम से जुड़ा है. पौष की कड़ाके की सर्दी से बचाव… भाईचारे के शाम… मौज मस्ती… नयी फसल के अच्छे होने की उमंग.. यही है लोहड़ी. पंजाब की सभ्यता का प्रतीक बना ये त्यौहार उदयपुर में भी पंजाबी समुदाय के बीच मुख्यतः मनाया जायेगा आज शाम..
ज़रा याद कीजिये ” वीर-ज़ारा” का वो गाना..जब अमिताभ, हेमा मालिनी के साथ साथ शाहरुख़ और प्रीटी ठुमके लगते हुए कहती है… “लो आ गयी लोहड़ी वे… बना लो जोड़ी वे…” ये कहना अतियोशक्ति नहीं होगी कि फिल्मो ने सारा प्रांतवाद ख़तम करके देश को एक सूत्र में पिरो दिया..जहाँ दक्षिण का मकर-विलक्कू पर्व हो या मध्य भारत की मकर सक्रांति.. या फिर उत्तर की लोहड़ी… सब एक हो गए है…
पंजाब में लोहड़ी की रात गन्ने के रस की खीर बनायीं जाती है जो अगले दिन माघी (मकर सक्रांति) के दिन खायी जाती है. ऐसा करना शुभ माना जाता है. यूँ तो लोहड़ी के साथ कई पुरानी रस्में और रंग जुड़े हैं पर समय के साथ अब इनका भी आधुनिकीकरण हो गया है.. पहले जहाँ गाँव में लोहड़ी के दिन गीत सुने देते थे, उनका स्थान अब “डीजे” ने ले लिया है.
कुछ भी हो, लेकिन आज भी लोहड़ी रिश्तों की मधुरता, आपस के प्रेम और सुकून का प्रतीक बनी हुई है. लोहड़ी की रात सगे-सम्बन्धियों, पड़ोसियों के साथ बैठकर हंसी-मजाक, नाच-गाना रिश्तो में नयी मिठास भर देता है. UdaipurBlog.com टीम ये उम्मीद करती है कि पवित्र अग्नि का यह त्यौहार मानवता को सीधा रास्ता दिखाने और रूठो को मनाने का जरिया बनेगा…
शहर में सिख कालोनी में आज शाम लोहड़ी की पवित्र अग्नि जलेगी… हर मन कह उठेगा…लो आ गयी लोहड़ी वे… तिल- गुड खाने और डीजे पर ठुमके लगाने… आप आ रहे है न… !!!!
आप सभी को लोहड़ी की बहुत बहुत शुभकामनाएं….

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