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उदयपुर के 4 महत्वपूर्ण गणेश मंदिर


हिन्दू धर्म में किसी भी काम को शुरू करने से पहले गणेश जी को ज़रूर याद किया जाता है। उदयपुर में यूँ तो गणेश जी के बहुत मंदिर है पर आज हम आपके सामने लाए है उदयपुर की इन चार चौकड़ी को, जिनके दर पर हर कोई अपना मत्था टेकना चाहता है। ये चारो है तो एक ही पर नाम अलग-अलग है।

आप में से कई लोग यहाँ जा चुके होंगे लेकिन जो नहीं गए है उन्हें एक बार ज़रूर जाना चाहिए :

  • पाला गणेश जी गुलाब बाग

    PalaGaneshUdaipur

इसे उदयपुर के सबसे पुराने गणेश टेम्पल्स में से एक बताते है। ये तक़रीबन 500 साल पुराना है। इस टेम्पल के बनने के पीछे एक कहानी है जो लाखा बंजारे से जुड़ी हुई है। आज से 500 साल पहले लाखा बंजारा इस जगह से गुज़र रहा था तो उसने कुछ देर विश्राम लेने की सोची। वहाँ उसने आसपास पड़े जानवरों के घोबर से गणेश जी की मूर्ति बना डाली। रात में जब ये लोग सो रहे थे तब सीसारमा नदी में तेज़ पानी आया और आसपास बंधे जानवर और गणेश जी की मूर्ति को बहा ले गया। इस बात से लाखा बंजारा बहुत दुखी हुआ और उसने महाराणा से गणेश मंदिर बनवाने की अरज़ कर डाली। इस वजह से इस टेम्पल को पाला गणेश जी बोला जाता है। यहाँ हर साल गणेश चतुर्थी पर बहुत बड़ा आयोजन होता है।

 

  • जाड़ा गणेश जी jada-ganesh ji

इस मंदिर को आज से 250 साल पहले एक पंडित परिवार ने बनाया। लोगो की श्रद्धा इस मंदिर से इतनी अपार है कि वो मानते है भगवान् इस मूर्ति में निवास करते है। वो ये भी कहते है कि इस मंदिर के आसपास का क्षेत्र इतना पवित्र है कि कोई भी बुरी शक्ति यहाँ आ ही नहीं सकती। ऐसा बताया जाता है इस मंदिर में लगी गणेश प्रतिमा सज्जनगढ़ किले के पत्थर से बनी है। यहाँ आज के दिन लोग गणेश प्रतिमा के साथ आमंत्रित होते है। इस मंदिर की पॉपुलैरिटी इतनी है, सुबह के 4 बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती है और रात के 12 बजह तक मंदिर के गेट खुले रखे जाते है ताकि सभी को दर्शन का मौका मिले। आपको यहाँ जाने के लिए चांदपोल की ओर से जाना होगा।

 

  • बोहरा गणेश जी Bohra-Ganesh-Ji-Medium

बोहरा गणेश जी का मंदिर लगभग 350 साल से भी ज्यादा पुराना है। इस मंदिर की अहमियत वैसी ही है जैसी मोती डूंगरी की जयपुर में है। यहाँ हर सप्ताह हज़ारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते है और गणेश चतुर्थी पर ये नंबर्स दुगुने हो जाते है। इस दिन 2-2.5 लाख लोग दर्शन के लिए आते है। यहाँ गणेश जी को छप्पन भोग लगाया जाता है। इस मंदिर को पहले ‘बोरगनेश जी’ बुलाते थे। मंदिर की पॉपुलैरिटी की वजह से ये पूरा इलाका अब बोहरा गणेश जी के नाम से जाना जाता है। इनका बोहरा इसलिए पड़ा क्यूंकि आज से 70-80 साल पहले जिस किसी को भी शादी-ब्याह, बिसनेस के लिए रुपयों की ज़रूरत पडती थी वो यहाँ आकर एक कागज़ पर लिख के चला जाता था, और उसे मंदिर रुपये दे देता था। पर एक शर्त पर उसे ये रुपये ब्याज के साथ लौटने होते थे। ये काम तब के जमाने में बोहरा लोग बहुत करते थे। इसलिए इनका नाम बोहरा गणेश जी गया।

 

  • दुधिया गणेश जी – dudhiya-g-558x640

दुधिया गणेश जी के मंदिर का निर्माण महाराणा सज्जन सिंह जी ने करवाया। इस मंदिर में रखी मूर्ति सज्जनगढ़ के नीव पड़ने से पहले स्थापित कर दी थी। हर गणेश चतुर्थी पर महाराणा और उनका परिवार वहाँ जाता था और पुरे शहर के लोगो के साथ गणेश चतुर्थी मानत था। इस मौके पर मंदिर को हज़ार दीयों के साथ सजाया जाता था और पुरे शहर में नुक्ती (मिठाई) बांटी जाती थी।

तो ये थे उदयपुर शहर में ही मौजूद चार महत्वपूर्ण गणेश मंदिर। अगर आप भी कोई गणेश मंदिर जानते है और उसके बारे में हमें बताना चाहते है तो हमें कमेंट बॉक्स में लिख भेजिए।

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Shubham Ameta

इंजीनियरिंग से ऊब जाने के हालातों ने लेखक बना दिया। हालांकि लिखना बेहद पहले से पसंद था। लेकिन लेखन आजीविका का साधन बन जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी। UdaipurBlog ने विश्वास दिखाया बाकि मेरा काम आप सभी के सामने है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हूँ। उर्दू पढ़ना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है, जो ताउम्र चलती रहेगी। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीं मुलाक़ात करते है फिर।

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