धार्मिक कट्टरता ने एक और ‘शंभूलाल’ को जन्म दिया, माउंट आबू की घटना

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धार्मिक कट्टरता का शिकार हुए ‘अफराजुल’ की निर्मम हत्या को अभी तक देश भुला नहीं पाया है और ठीक वैसी एक और घटना दोहराई गयी है। माउंट आबू से 30 किलोमीटर दूर एक और ‘शंभूलाल’ ने जन्म लिया।

सूत्रों की माने तो विजय मीणा नाम के शख्स ने एक बुजुर्ग मुस्लिम आदमी को पीट पीटकर ‘जय श्री राम’ बुलवाया, और उसका वीडियो बनाया। ये वाक़या तब सामने आया जब उसी के द्वारा बनाया गया ये वीडियो वायरल हो गया। लोकल पुलिस ने एक्शन लेते हुए 18 वर्षीय विजय मीणा को धार्मिक भावनाएं आहत करने और शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। विजय मीणा ने ये वीडियो सोमवार रात को बनाया और खुद ने ही सर्कुलेट भी किया।

इस तीन मिनिट के वीडियो में विजय मीणा 45 साल के मोहम्मद सलीम को मार मारकर ‘जय श्री राम’ बुलवाते हुए साफ़ दीख रहा है। जवाब में मोहम्मद सलीम बार बार ये कहते सुने जा सकते है कि, “परवरदिगार सबसे बड़ा है।”

मुस्लिम लीडर्स ने FIR दर्ज करवाई फिर विजय मीणा को पकड़ लिया गया। ये जानकारी पुलिस ऑफिसर ओम प्रकाश ने बताई।

The Muslim Man who was forced to say Jai Shri Raam

माउंट आबू राजस्थान के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन में गिना जाता है और वहां पर ऐसी घटना का होना प्रश्न उठाता है कि आखिर माउंट आबू, राजसमन्द जैसे छोटे शहर के युवा क्यों इस क़दर इन सब गतिविधियों में शामिल हो रहे है? इसका जवाब भी ‘शंभूलाल’ के केस में सामने आया ही था। व्हाट्सएप्प, फेसबुक के जमाने में तब जब इनटरनेट इतना सस्ता हो चला है। कोई भी कैसे भी पोस्ट, वीडियो को बना कर इस पर डाल सकता है और सर्कुलेट कर सकता है। ये बात भले ही चुभे लेकिन सच भी है कि बेरोज़गारी के इस दौर में आज का युवा अपना ज्यादातर समय सोशल साइट्स पर ही निकलता है। बिना जांचे परखे मैसेज फारवर्ड कर देता है। उसके परिणाम बहुत बुरे होते है। ‘शंभूलाल’ इसका उदाहरण था और अब विजय मीणा का भी उदाहरण बनना इस बात की गवाही देता है। मुझे नहीं लगता कि पढ़े लिखे लोग चाहेंगे कि ऐसे उदाहरण हमारे समाज में बढ़ते रहे।

ये सब पढ़ने सुनने के बाद सआदत हसन मंटो की एक लाइन याद आती है जिसमें वो कहते थे, ” ये समाज पहले से नंगा है उसे कपड़े पहनाना मेरा काम नहीं है, वो तो एक दर्जी का है। मैं तो बस उसे आईना दिखा रहा हूँ।”

ये घटनाएं हमारे लिए आईने का ही काम कर रही है अब भी हम नहीं संभले तो अगले विजय मीणा या सलीम मोहम्मद कहीं हम खुद ही ना हो, और मेरे जैसा कोई और फिर यही सब कुछ लिख रहा हो।

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इंजीनियरिंग से ऊब जाने के हालातों ने लेखक बना दिया। हालांकि लिखना बेहद पहले से पसंद था। लेकिन लेखन आजीविका का साधन बन जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी। UdaipurBlog ने विश्वास दिखाया बाकि मेरा काम आप सभी के सामने है। बोलचाल वाली भाषा में लिखता हूँ ताकि लोग जुड़ाव महसूस करे। रंगमंच से भी जुड़ा हूँ। उर्दू पढ़ना अच्छा लगता है। बाकि खोज चल रही है, जो ताउम्र चलती रहेगी। निन्मछपित सोशल मीडिया पर मिल ही जाऊँगा, वहीं मुलाक़ात करते है फिर।

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